मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७२२ मार्क्सवाद और रामराज्य दिखाया जा सकता है । इस तरह अधिष्ठातारूप अर्थात् अनेक कारणोंके सन्निधायक रूपसे एक सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान् चेतन कारणका मानना बौद्धोंके लिये अनिवार्य होगा । यद्यपि बौद्ध कहते हैं कि अनपेक्षित बीज एवं क्षित्यादि अन्त्यक्षणको प्राप्त होकर अङ्कुरका आरम्भ करते हैं । उपसर्पण प्रत्ययवशसे परस्पर समवधान होता है । यह नहीं कहा जा सकता कि एक ही कारणसे कार्यसिद्धि हो सकती है । यदि एक कारणसे कार्यसिद्धि हो जाय तो अन्य कारणोंकी अपेक्षा ही क्या रह जायगी । अतः कारणचक्रके अनन्तर ही कार्यकी उत्पत्ति होती है । अतः एक कारण कार्योत्पत्तिका साधक नही । जड़कारण स्वयं प्रेक्षावान् नही होते अतः वे यह नही सोच सकते कि हममेसे एक भी कार्य सम्पन्न कर सकता है फिर हम सबके सन्निधानसे क्या लाभ किंतु उपसर्पण प्रत्ययवशात् उनमें परस्पर सन्निधान उत्पन्न होता है । वे न तो असन्निहित रह सकते न अनुत्पादक रह सकते हैं । उन अनपेक्ष कारणोंको प्राप्त करके कार्य भी न उत्पन्न होनेमे असमर्थ ही रहता है । स्वमहिमासे सब कारण कार्योंका उत्पादन करते हुए भी नाना कार्योंका उत्पादन नहीं कर सकते । एक ही कार्यकी उत्पत्तिमे उनका सामर्थ्य होता है । बीजके द्वारा अङ्कुरजननमें ही मृत्तिका जलादिकी सहकारिता होती है । अतः उनके द्वारा भी उस अङ्कुरकी ही उत्पत्ति होती है,। कारणभेदसे कार्यभेद आवश्यक नहीं, क्योकि सामग्री एक होनेसे ही कार्य एक होता है । परंतु बौद्धोका यह कथन असंगत है, क्योकि यदि अन्त्यक्षणप्राप्त कारण स्वयं कार्यजननमे अनपेक्ष ही रहते हैं, अर्थात् किसीकी अपेक्षा नही रखते हैं तो इसी क्रमसे पूर्व पूर्वके कारण भी स्वक्रमजननमे अनपेक्ष ही रहेगे । कुसूलमे अङ्कुरजननोपयोगी बीजसन्ताननिर्वर्तक बीजक्षण और भक्षणादि उपयोगी बीजक्षण भी है । यद्यपि इस सम्बन्धमें यह विरोधी अनुमान नहीं किया जा सकता हे कि कुसूलगत विगतबीजक्षण ( अर्थात् अङ्कुरोपजननोपयोगी बीज- सन्ताननिर्वर्तकबीजक्षण ) अनपेक्ष होकर बीजक्षणका जनन नही करता । कुसूलस्थ होनेके कारण “जैसे तत्कालोद्धृतभक्षित बीजक्षण अनपेक्ष होकर बीजक्षण नही जनन करता है” । परंतु इस अनुमानमे अङ्गुरोपयोगि संतानानन्तःपातित्व उपाधि है । अनपेक्ष बीजक्षणाजनकत्वरूप साध्य तत्काल भक्षित बीजक्षणमे है । उसमे अङ्कुरो- पयोगि संतानानन्तः पातित्व है, कुसूलस्थत्वरूप साधन अङ्कुरोपयोगि संतान निर्वर्तक बीजक्षणमें है । परंतु वहाँ उपाधि नहीं है, अपितु अङ्कुरोत्पादनोपयोगि संतानानन्तः पातित्व ही है । अतः कुसूलस्थताकी समानता होनेपर भी जिस कुसूलस्थ बीजको स्वकार्यक्षण परम्परासे अङ्कुरोत्पत्ति समर्थ बीजक्षण जनन करता है, वह बीजक्षण स्वकार्यजननमें