भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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पृथकीकरण है। इसके अनुसार व्यवस्थापन, शासन तथा न्याय—इन तीनोको उसने अलग किया । ४-प्लेटोने विवेकको प्रधान माना था । यद्यपि आगे चलकर उसने भी नियमपर जोर दिया, किंतु अरस्तूने नियमका ही प्राधान्य माना है, जिनमे परम्परागत तथा नैसर्गिक नियम मुख्य है । सत्ताधारीको इनके अधीन होना चाहिये । ५-आदर्श राज्य वह है, जिसमे मध्यम मार्गीय व्यवस्था हो—न ज्यादा गरीब न ज्यादा अमीर । प्लेटोने ५०४० व्यक्तियोके राज्यको आदर्श राज्य माना था, किंतु अरस्तूने माना कि आदर्श राज्यमें गुणात्मक तथा मात्रात्मक दोनोका संतुलन होना चाहिये । ६-राजनीति शास्त्रको इसने धर्मसे स्वतन्त्र किया, जब कि प्लेटोने आचार-शास्त्रपर आधारित राजनीतिका ही श्रेष्ठ तथा उपयुक्त माना था । उसके अनुसार सद्गुणी नागरिकके लिये सद्गुणी शासन आवश्यक था । अरस्तूने राजनीतिकी प्रधानता दी; यद्यपि उसका भी लक्ष्य आदर्श नागरिक निर्माण ही था । वह राजनीतिको शास्त्र ही नही, कला भी मानता था । उसके अनुसार 'राजनीति शास्त्र' उसे कहते है ‘जो राजनीतिक बन्धनके आधारका विश्लेषण करे ।' वैय