भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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अज्ञानकी स्मृति होती है, उसीके साथ अहम्‌अर्थ 'मैं' की भी स्मृति होती है। स्मृति बिना अनुभवके नहीं हो सकती; अतः 'मैं'का भी सुषुप्तिमें अनुभव होना ही चाहिये; परन्तु उनका यह कहना उचित नहीं जान पड़ता, क्योंकि सोऽहमर्थः सदा ही इच्छादि गुणोंमें विशिष्ट ही उपलब्ध होता है। परन्तु जब कि सुषुप्तिमें इच्छादिका उपलब्ध होता ही नहीं; तब केवल अहम्‌अर्थका उपलब्ध कैसे माना जाय ? गुणरहित केवल गुणीका उपलब्ध असम्भव है। जैसे रूपाविरहित घटका ज्ञान नहीं हो सकता, वैसे ही इच्छा-द्वेषादि गुणरहित अहम्‌अर्थका ज्ञान नहीं हो सकता। गुणीका ग्रहण गुण- ग्रहण बिना नहीं हो सकता। यदि कहा जाय कि एकदेश सत्त्वानन्द गुणसे युक्त ही अहम्‌अर्थका सुषुप्तिमें अनुभव होता है तो यह भी ठीक नहीं, क्योंकि सुषुप्तिमें विशिष्ट बुद्धि अङ्गीकार करनेपर उसके सुषुप्तित्त्वका ही भङ्ग हो जायगा। इसके सिवा गुणि-ग्रहणमें विशेषगुणग्रहण हेतु होता है। अतः रूपादि विशेष गुणग्रहण बिना घटादिका ग्रहण नहीं होता। यदि कहा जाय कि रूपाविरहित घटादि होते ही नहीं;