भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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[Header] मार्क्ससीय अर्थ-व्यवस्था ३३७

अतः कामके घंटे और मजदूरीका निष्पक्ष न्यायालयद्वारा तय होना उचित है। पैदावारके साधनोकी उन्नति यदि दोष नहीं है तो उसका होना उचित ही है। और जो पैदावारके साधनोंकी उन्नति कराता है, उसे उसका फल भी मिलना उचित ही है। फिर दूसरेकी उन्नतिसे दूसरेके पेटमें दर्द हो, इसे सिवा ईर्ष्याके और दूसरा क्या कहा जा सकता है ? कामके घंटोमें कमी होनेसे अधिकाधिक लोगोंको काम मिलेगा, वेकारी घटेगी, इससे जनतामें क्रय-शक्ति बनी रहेगी, मालकी खपत बढ़ेगी, जिससे उत्पादनमें बाधा न पड़ेगी। जिन वस्तुओंका उत्पादन उपभोक्ताओंकी आवश्यकतासे अधिक होने लगे, उनपर प्रतिबन्ध लगाकर अन्य उपयोगी वस्तुओंके उत्पादन एव तदुपयोगी उत्पादन-साधनोंके निर्माणका प्रयत्न होना चाहिये। इससे सभीका हित है। अतः इसके अनुकूल सरकारी प्रोत्साहन, प्रेरणा तथा आवश्यक आदेश भी होना चाहिये। इस तरह वेकारी भी रुकेगी, मालके खपतमे भी बाधा नहीं पड़ेगी और उपभोक्ताओंको आवश्यक उपभोग-सामग्री भी मिल सकेगी। यान्त्रिक विकासमें भी बाधा नहीं पड़ेगी और