भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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गये, नमूनेकी खुशहाली दिखायी गयी । ठीक वैसे ही रूस आदिमें भी नमूनेके ग्राम, नमूनेकी सुव्यवस्थाएँ ही अधिक दिखायी जाती हैं। पूँजीवादी ढंग- से कल, कारखानोंकी कम्युनिष्ट भरपेट निन्दा करते हैं, परन्तु उनका बहिष्कार नहीं करना चाहते । वे ही चीजें गैर कम्युनिष्टोंके हाथोंमें रहती हैं तो दूषण समझी जाती हैं, कम्युनिष्टोंके हाथ पहुँचते ही वे निर्दोष हो जाती हैं। रामराज्यवादी तो महायन्त्रोंके निर्माणपर प्रतिबन्ध ही उचित समझता है अन्यथा उसकी सीमा तो होनी ही चाहिये । आखिर पूँजीवादी कल-कारखानोंमें कम्युनिष्ट जो-जो दोष दिखाते हैं, वह सब कम्युनिष्टोंके हाथ आनेसे कैसे दूर हो जायँगे ? कल-कारखानोका बढ़ना, मशीनोंके रफ्तारका बढ़ना, मजदूरोकी माँग-वृद्धि, ग्रामीणोंका शहरोंकी ओर दौड़ना आदि तो कम्युनिष्टोके कल- कारखानोंसे भी होगा ही । इसी तरह बड़े-बड़े फार्मोंका विस्तार कम्युनिष्ट राज्योंमें भी हो ही रहा है । वस्तुतः यह तो मार्क्सवादी भी मानता है कि कल- [L1