भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

पृष्ठ 703, कुल 866 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 703

३९० मार्क्सवाद और रामराज्य क्रय-शक्तिके घटने और बाजारमें माल न खपत होनेका प्रश्न ही नहीं उठेगा । पूँजीवादमें कल-कारखाने व्यक्तिगत होते हैं, अतः पूँजीपतिके सामने मुनाफा कमाना ही मुख्य लक्ष्य रहता है । वह आवश्यकताभर उपयोगी वस्तु पैदा करके कारखानोको वद नहीं रख सकता, क्योकि इससे उसका आर्थिक नुकसान होता है । वह बराबर कारखाना चलाकर माल पैदा करता है और दूसरे देशोके बाजारोको माल खपतके लिये ढूँढता है । बेकार मजदूरोकी परवा भी उसे नही होती; परंतु वेकारीसे यदि ९५ प्रतिशत मजदूरोकी क्रय-शक्ति घट जायगी तो बाजारोमे माल- की खपत न होनेसे पूँजीवादके सामने गतिरोध अनिवार्य होगा । जब सब कारखाने एवं उत्पादन-साधन मजदूर सरकारके हाथमें होगे, तब मुनाफा कमाना उसका लक्ष्य ही नहीं होगा । वह तो उपयोगके लिये ही वस्तु-निर्माण करायेगी । उपयोग वस्तु पैदा हो जानेपर कारखानोको द भी रख सकती है । उसके यहाँ मजदूरोको अन्य उपयोगी वस्तु-निर्माणमे लगाया जा सकता है । सभी नागरिकोके लिये अच्छी मोटर, अच्छे मकान, अच्छा भोजन, अच्छा वस्त्र आदि' उपयोगी वस्तुओके निर्माणके लिये नये-नये कारखाने बनाये जायेंगे । उनसे सब लोगोको काम दिया जायगा । यन्त्रोके पूर्ण विकास हो जानेपर जब फिर थोडे ही समयमें थोड़े ही आदमियोद्वारा सब उपयोगी वस्तुओका निर्माण हो जायगा तो भी बारी-बारीसे थोड़ा-थोड़ा काम सबसे लिया जायगा । सप्ताहमें एक दिन या मासमे एक दिन ही सबको काम करना पडेगा । शेष समय साहित्य, विज्ञान, कला आदिके सीखनेमे लोग लगा सकते हैं । इस तरह जो समस्या पूँजीवादमे हल नहीं हो सकती, वह सब कम्युनिज्ममे हल हो जायगी ।' परंतु यह ठीक नहीं है; क्योकि जहाँ भी ईमानदारीपूर्वक उत्पादन एवं - ईमानदारीसे वितरणकी व्यवस्था होगी, वही उक्त समस्याका समाधान हो सकता है । किसी भी अच्छे शासनका यही लक्ष्य होता है कि राष्ट्रकी जनताको योग्यता एवं आवश्यकताके अनुसार काम, दाम, आराम मिले । किसीको काम, दाम, आरामके अभावमे वेकारीका मुकाविला न करना पडे—यह बात कम्युनिष्ट सरकार बन जाने मात्रसे सम्पन्न नहीं हो सकती । कम्युनिष्ट सरकार भी कोई समस्या जादूकी छडीसे नही सुलझा सकती, किंतु काम, दाम, आरामके वितरणमें ईमानदारी लानेसे ही समस्याओका समाधान हो सकता है । ईमानदारीके बिना वितरणमें वैषम्य, पक्षपात होना स्वाभाविक है । कम्युनिष्टोमें भी पदाधिकारके लिये होड चलती ही है। इसीसे जारशाही खतम होते ही क्रान्तिकारियोमे दलवन्दियों हुई और पक्षपात, मारकाट शुरू हो गयी । ईमानदारी होनेके कारण ही धर्म-नियन्त्रित राम-राज्य या कोई भी शासन उक्त समस्याका समाधान कर सकता है । अर्थात् किसीका वैध स्वत्व एव अधिकार बिना छीने भी आमदनी एव उसके उपयोगपर नियन्त्रण किया