भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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मार्क्सीय अर्थ-व्यवस्था ३९९ सब उच्चस्तरीय साधन चाहेंगे तो उसकी पूर्ति तो हजारो नहीं लाखो वर्षतक हो सकना सम्भव नही। गली-गलीमे बिजलीका फैल जाना या मिलोंके द्वारा कपडा जितना सरल है उतना भारतके पैंतीस करोड आदमियोंको एक-एक वायुयान, एक-एक ब्यूक मिलना सरल नही। इसी तरह केसर, कस्तूरी, हीरा आदिका मिलना भी सम्भव नही है। जब सभी लोग सब चीज बना नहीं सकते तो विनिमयद्वारा वस्त्वन्तर प्राप्त करनेकी आवश्यकता रहेगी ही। फिर वस्तुओकी विनिमय-सुविधाके लिये रुपया या मुद्राका व्यवहार आवश्यक होगा। स्थानान्तरसे वस्तु स्थानान्तरमे पहुँचाना आवश्यक होगा। इसपर कुछ व्यय एव श्रम भी होगा। व्यक्ति या सरकार जो भी यह कार्य करेगा कुछ-न-कुछ लाभ अवश्य चाहेगा। हाँ, यह ठीक है कि मुनाफा सीमित हो, अव्यवस्था फैलानेवाला न हो। आजके विस्तृत यातायात-सम्बन्धोंका यह भी एक महान् लाभ है कि संसारके किसी कोनेमे कोई वस्तु क्यो न उत्पन्न हो और कहीं भी किसी वस्तुकी कमी क्यो न हो, फिर भी देशान्तरकी वस्तु देशान्तरमे पहुँचनेमें कोई कठिनता नहीं। अतिवृष्टि, अनावृष्टिसे कही भी भुखमरी नही हो सकती। परंतु यदि क्रय-विक्रयका व्यवहार मिट जायगा तो यह सब सम्भव न होगा। अनेक रोजगारोंके समान ही क्रय-विक्रय भी एक धंधा है। लाभ बिना उसे कौन अपनायेगा? हाँ, लाभ सीमित हो, उसपर नियन्त्रण हो, यह तो आवश्यक ही है। भुखमरी मिटाना अमीर, गरीब सबके ही अभ्युदयका प्रयत्न करना अपेक्षित वस्तुओका उत्पादन बढ़ाना अत्यावश्यक है ही। समाजवादी कहते हैं कि 'रूसमें रोटीकी कमी नहीं है। सम्भव है कुछ ही दिनोमे वहाँ रोटी सबको मुफ्त मिलने लगे, जैसे होटलोमे पानी मुफ्त मिलता है। परंतु रामराज्यका तो आदर्श यह था कि किसी भी जगह पानी माँगनेपर दूध ही पिलाया जाता था। देनेवाले सदा ही देनेकी कोशिश करते थे, परंतु लेनेवाले अपनी गाढी कमाईका ही खाना पसंद करते थे। प्रतिग्रहसे हर तरहसे बचनेका प्रयत्न करते थे। रूसी तो फिर भी यह कहते रहेंगे कि जो काम न करे उसको खाना मिलना ही न चाहिये। फिर जहाँ लोगोकी व्यक्तिगत सम्पत्ति ही न रहेगी, वहाँ काम लेकर रोटी देनेका प्रसङ्ग ही क्या है? रामराज्यमें वृद्ध, बालक काम न कर सकनेवालोको भी भोजनादिकी सुविधा रहेगी। जिस व्यक्तिगत सम्पत्तिमे सबकी कमाई नही सम्मिलित है, उसके द्वारा लोगोको मुफ्त रोटी देनेकी विशेषता ही मुख्य विशेषता है। साम्यवादी व्यवस्थामें तो सबकी कमाई सम्मिलित ही रहती है। रामराज्यकी सभ्यता ही थी कि रोटी एव दूध आदिका कोई गृहस्थ विक्रय करना पाप समझता था। क्षीर-विक्रय, रस-विक्रय तो स्पष्ट निषिद्ध है। रामराज्यमें आवश्यक उपयोगी पदार्थ सबको सरलतासे सुलभ करना ध्येय ही है। समाज-