मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउड़ानेवाले वायुको, फिर वायुको रोकनेवाले पर्वतोंको और अन्तमें पर्वतोंमें भी बिल कर देनेवाले मूषकको सर्वश्रेष्ठ समझकर उसे ही पति बनाया । निष्कर्ष यह है कि संस्कारोंमें उच्चता धीरे-धीरे आ सकती है, एकाएक नहीं, अतः कुलीनताका बड़ा महत्त्व है । भारतीय राजनीतिज्ञोंने सेनामें कुलीन योद्धाओंका संग्रह आवश्यक बतलाया है । युद्धमन्त्री और प्रधानमन्त्रीकी नियुक्तिमें भी विशिष्टरूपसे कुलीनताका ध्यान आवश्यक बतलाया गया है। यहाँ कुलीनता तथा शालीनताका ध्यान केवल बुरे कर्मोंसे बचनेके लिये ही है, घमण्ड या अभिमानके लिये नहीं । दोषत्याग एवं गुणार्जनके लिये ही गौरवका उपयोग होता है । 'श्रीमद्भागवत'में बतलाया गया है कि 'भगवद्विमुख, विविध गुणयुक्त ब्राह्मणकी अपेक्षा भगवद्भक्त चाण्डाल भी श्रेष्ठ है । भगवद्भक्त चाण्डाल अपने कुलसहित कृतार्थ हो जाता है, परन्तु घमण्डी ब्राह्मण आत्मकल्याण करनेमें भी समर्थ नहीं होता ।' इसी अभिप्रायसे किसी शासकने एक ही अपराधमें पकड़े गये चार अपराधियोंको उनके कुल, संस्कार, योग्यता आदिके अनुसार चार प्रकारके दण्ड दिये । जिसे केवल सामने आते ही छोड़ दिया गया, उसकी न्यायालयसे बाहर निकलते-ही-निकलते हृदयगति अवरुद्ध होकर मृत्यु हो गयी । जिससे यह कहा गया कि 'आप ऐसे, और आपका यह काम !' वह अपने आप फाँसी लगाकर मर गया । जिसे कुछ भला-बुरा कहा गया, वह देश छोड़कर चला गया और जिसे दस बेंतकी सजा दी गयी, वह दस ही दिनोंके बाद पुनः उसी अपराधमें पकड़ा गया । इस तरह कुल, जाति, राष्ट्र आदिके अभिमानसे कुल, जाति एवं राष्ट्रके गौरवस्वरूप आदर्शभूत महापुरुषोंके स्मरणसे, उनके आदर्शोंसे प्रेरणा प्राप्त होती है । हीन पुरुषोंके चिन्तनसे हीन प्रेरणा मिलती है और उत्तम पुरुषोंके चिन्तनसे उत्तम प्रेरणा मिलती है । यह प्रत्यक्ष है कि विशिष्ट संगीत सुनने तथा विशिष्ट संगीतज्ञके दर्शन या माहात्म्य-श्रवणसे संगीतमें प्रवृत्ति होती है । विशिष्ट वीर पुरुषोंकी वीरगाथा सुननेसे मनमें वीरताका सञ्चार होता है । कामिनी-दर्शन या कामकलाके दर्शन, श्रवणादिसे काम-भावना जागरूक होती है । सर्प, व्याघ्रादि भीषण प्राणियोंके दर्शनसे भय उत्पन्न होता है । सत्पुरुषोंके दर्शन, श्रवणादिसे सद्भावना उत्पन्न होती है । परोपकारी, दयालु, देशभक्त आदिके दर्शन, श्रवणसे भी उस-उस ढंगके भाव उद्रिक्त होते हैं । विभिन्न राष्ट्रोंके विभिन्न ऐतिहासिक संस्मरण होते हैं । उनसे विभिन्न महापुरुषों, अवतारों, पैगम्बरों, तीर्थंकरों आदिके विशिष्ट सम्बन्ध होते हैं । वे स्थान, वे देश उन-उन