भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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५२० मार्क्सवाद और रामराज्य समकोण नहीं बनाते । प्रकाशकी किरणे ऋजु रेखाओंमे नही फैलती । जिस वस्तुपर प्रकाश-रश्मि पड़ती है उसपर दबाव डालती है। सीमित एव गोलाकार दिक्का आकार निरन्तर तेजीसे बढता जा रहा है । दिक् पारिमाणिक नही । एक परमाणुका प्रभाव सम्पूर्ण विश्वपर रहता है। परमाणुमे एलेक्ट्रान (परमाणुका अस्थिर शक्तिकण ), प्रोटान (केन्द्रित शक्तिसमूह ) के चारो ओर घूमे हुए बिना ही बीचके स्थानकी यात्राके एक मार्ग-चिह्नसे दूसरे मार्ग-चक्रमें पहुँच जाता है। आज तो विज्ञान-वेत्ताओने विद्युत्कण- को स्वेच्छाचारी भी मान लिया है, जिसमे यन्त्रवादका बिल्कुल ही नाश हो जाता है। जिस आइजक न्यूटनके केन्द्रिय आकर्षणका सिद्धान्त आज भी श्रद्धासे पढाया जाता है, उसीके सम्बन्धमें सालिवानका कहना है कि न्यूटनका यह आविष्कार और इसकी पुष्टि मानुषी बुद्धिकी चरम कृति समझी जाती थी, तो भी आज हम केन्द्रियाकर्षणकी व्याख्या सर्वथा भिन्न परिभाषाद्वारा करते हैं । इस विषयपर हमारा सम्पूर्ण दृष्टिकोण न्यूटनके दृष्टिकोणसे जडसे ही भिन्न है । न्यूटनके सिद्धान्तको लागू करनेसे कई अंगोंमें वह अवास्तविक और अशुद्ध ठहरता है । आज वह प्रणाली जड और शाखासहित उखाड फेकी गयी, जिसकी नींवपर इस सिद्धान्तको खड़ा किया गया था । इस तरह आजके पाठ्यग्रन्थोमे पढाया जाता कि पृथ्वीमें गम्भीर प्रवेश करनेवाली प्रकाशरश्मियाँ दूरवर्ती तारक गणोके स्तरपर हो रहे द्रव्यनिर्माणकी उपज हैं । दूसरे सिद्धान्तद्वारा इसी प्रकारकी उपजका कारण द्रव्यनाश बतलाया जाता है, जो कि ठीक पूर्वके विपरीत है । एक सिद्धान्तके अनुसार अस्थिर विद्युत्कण तरङ्गका गुण रखते हैं, दूसरे सिद्धान्तके अनुसार कणोका इनमेंसे किसीका भी त्यागना सम्भव नही, क्योकि कुछ घटनाओकी व्याख्या पहले सिद्धान्तानुसार होती है, कुछका दूसरे ही द्वारा । मनोविज्ञानके क्षेत्रमें भी परस्परविरोधी सिद्धान्तोपर आधारित चार सम्प्रदायें बन गयी हैं । इनफ्रायड एटलर यूग और स्टैककैलके सम्प्रदायमें बड़े-बडे प्रतिभाशाली विद्वान् अपने पक्षका समर्थन करते हैं । जीवशास्त्रमे भी आकस्मिक परिवर्तनोके प्रश्नपर प्रो० वाइजमैन एवं लेमार्कके अनुयायी एक दूसरेका निरन्तर विरोध करते हैं । एलौपैथिकमें बी० सी० जी० के प्रामाणिक विद्वान् पी० बी० बैजमिनके अनुसार बी० सी० जी० प्रभावशाली एवं निगपद यक्ष्मानिरोधक उपचार है । पर डाक्टर डब्ल्यू० एफ० ब्राडले (इग्लैंड) अभी भी इसे विवादास्पद ही समझते हैं । पाश्चात्य मनोविज्ञानका प्रवर्तक फ्रायड कहता है कि हिस्टीरियामें जो डाक्टर औषध देता है वह कोरा ठग है, किंतु सभी डाक्टर हिस्टीरियामें औषध देते हैं । साल्विानके अनुसार सत्यसे वैज्ञानिकोका वास्तविक अन्तिम अभिप्राय सुविध.से है । वैज्ञानिक सैद्धान्तिक दृष्टिकोणसे अपने-आपको कुछ