मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमार्क्स-दर्शन ५४१ अपौरुषेय तथा आर्षशास्त्रोमे विज्ञात भूत एवं उससे भी अधिक उच्च स्तरकी सत्त्व, रज, तम आदिकी साम्यावस्थारूप प्रकृति अत्यधिक सूक्ष्म है और उसका भण्डार सचमुच अखण्ड है । उसीसे सब कमियोकी पूर्ति होती रहती है । उसी कारण धरतीसे अगणित अपरिमित अन्नोंके उपजानेपर भी उसका भण्डार नहीं टूटता । उत्ताप एव वैद्युतिक परिवर्तन सबही यान्त्रिक गतिपूर्वक ही है । यह जैसे मान्य है, वैसे ही अन्य परिवर्तनोंमें भी ईश्वरीय या मानवीय यान्त्रिक गति ही काम देती है । इसीलिये विशिष्ट गुणसम्पन्न भूतकी प्रत्येक अवस्था चेतनद्वारा ही आविष्कृत होती है । विपरीत गुणमे परिवर्तन भी यान्त्रिक गतिका ही परिणाम है । निर्विरोध प्रतियोगिता या एकाधिकार अपनी अपनी सीमामें गुण है । राम- राज्य-प्रणालीमें जहाँ विकासके लिये प्रतियोगिता गुण है वहाँ वह निःसीम भी नहीं है । इसीलिये तो महायन्त्रोंके निर्माणपर प्रतिबन्ध आवश्यक समझा गया है । [ प्रतियोगितापर भी नियन्त्रण अपेक्षित माना गया है, उत्पादनके केन्द्रीयकरणकी अपेक्षा विकेन्द्रीकरणको रामराज्य-प्रणाली अधिक महत्त्व देती है, परंतु समाज- वादमें उलटा महायन्त्रोंका अधिकाधिक विकास करके छोटी फैक्टरियोंका अस्तित्व सर्वथा ही समाप्त कर दिया जाता है । समाजवादियोका फैसला तो बन्दरबाँटका फैसला है । मजदूरों तथा छोटी फैक्टरियोंका पक्ष लेकर मिलमालिको एवं बड़े- बड़े कल कारखानोंको भला-बुरा कहते-कहते बड़े-छोटे सब कारखानो, मालिक- मजदूर, किसान, जमींदार सभी भूमि-सम्पत्ति, उद्योग धंधेको राष्ट्रीयकरणके नाम- पर छीन लेते हैं । समाजवादी समाजके नामपर ऐसा भीषण तानाशाही एकाधि- कार स्थापित करते हैं कि सबकी भूमि, सम्पत्ति, कल, कारखानोको छीनकर लेखन, भाषणकी स्वतन्त्रता छीनकर सभीको परतन्त्रताके बन्धनोंमें जकड़ देते हैं । कहा जाता है कि "गुणसे परिणामके परिवर्तनका साधारण उदाहरण है अच्छा बीज, जिसके बोनेसे उपजका परिमाण बहुत बढ़ जाता है । इसी तरह रूसकी सामूहिक खेती इसका दूसरा उदाहरण है जिसके कारण भी उपजका परिमाण बहुत बढ़ जाता है । लेवीने गुणपरिवर्तनके सम्बन्धमें वस्तुओको दो श्रेणियोंमें विभक्त किया है । कणिक ( वैयक्तिक, आटोमैटिक ) तथा सामूहिक ( स्टैटिस्टिकल ) [L2