मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण
Matsya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या | अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| डग पृथ्वीका दान, वामनद्वारा बलिका बन्धन और वर प्रदान ........ ९४२ | २६५- प्रतिमाके अधिवासन आदिकी विधि ..... १०१३ |
| २४७- अर्जुनके वाराहावतारविषयक प्रश्न करनेपर शौनकजीद्वारा भगवत्स्वरूपका वर्णन ........ ९४८ | २६६- प्रतिमा-प्रतिष्ठाकी विधि ...... १०१७ |
| २६७- देव (प्रतिमा)-प्रतिष्ठाके अङ्गभूत अभिषेक-स्नानका निरूपण ...... १०२२ | |
| २४८- वराहभगवान्का प्रादुर्भाव, हिरण्याक्षद्वारा रसातलमें ले जायी गयी पृथ्वीदेवीद्वारा यज्ञवराहका स्तवन और भगवान्द्वारा उनका उद्धार ........ ९५२ | २६८- वास्तु-शान्तिकी विधि ...... १०२५ |
| २६९- प्रासादोंके भेद और उनके निर्माणकी विधि ...... १०२८ | |
| २४९- अमृतप्राप्तिके लिये समुद्र-मन्थनका उपक्रम और वारुणी (मदिरा)-का प्रादुर्भाव ........ ९५७ | २७०- प्रासाद-संलग्न मण्डपोंके नाम, स्वरूप, भेद और उनके निर्माणकी विधि ...... १०३२ |
| २७१- राजवंशानुकीर्तन ...... १०३५ | |
| २५०- अमृतार्थ समुद्र-मन्थन करते समय चन्द्रमासे लेकर विषतकका प्रादुर्भाव ........ ९६३ | २७२- कलियुगके प्रद्योतवंशी आदि राजाओंका वर्णन ...... १०३७ |
| २५१- अमृतका प्राकट्य, मोहिनीरूपधारी भगवान् विष्णुद्वारा देवताओंका अमृत-पान तथा देवासुरसंग्राम ........ ९६८ | २७३- आन्ध्रवंशीय, शकवंशीय एवं यवनादि राजाओंका संक्षिप्त ऐतिहासिक विवरण ... १०४० |
| २७४- षोडश दानान्तर्गत तुलादानका वर्णन ...... १०४६ | |
| २५२- वास्तुके प्रादुर्भावकी कथा ........ ९७१ | २७५- हिरण्यगर्भदानकी विधि ...... १०५३ |
| २५३- वास्तु-चक्रका वर्णन ........ ९७३ | २७६- ब्रह्माण्डदानकी विधि ...... १०५५ |
| २५४- वास्तुशास्त्रके अन्तर्गत राजप्रासाद आदिकी निर्माण-विधि ........ ९७७ | २७७- कल्पपादप-दान-विधि ...... १०५७ |
| २७८- गोसहस्र-दानकी विधि ...... १०५९ | |
| २५५- वास्तुविषयक वेधका विवरण ........ ९८१ | २७९- कामधेनु-दानकी विधि ...... १०६२ |
| २५६- वास्तु-प्रकरणमें गृह-निर्माणविधि ........ ९८३ | २८०- हिरण्याश्व-दानकी विधि ...... १०६३ |
| २५७- गृहनिर्माण (वास्तुकार्य)-में ग्राह्य काष्ठ ..... ९८६ | २८१- हिरण्याश्वरथ-दानकी विधि ...... १०६५ |
| २५८- देवप्रतिमाका प्रमाण-निरूपण ........ ९८८ | २८२- हेमहस्तिरथ-दानकी विधि ...... १०६६ |
| २५९- प्रतिमाओंके लक्षण, मान, आकार आदिका कथन ........ ९९३ | २८३- पञ्चलाङ्गल (हल) प्रदानकी विधि ...... १०६८ |
| २६०- विविध देवताओंकी प्रतिमाओंका वर्णन .... ९९६ | २८४- हेमधरा (सुवर्णमयी पृथ्वी)-दानकी विधि ...... १०७० |
| २६१- सूर्यादि विभिन्न देवताओंकी प्रतिमाके स्वरूप, प्रतिष्ठा और पूजा आदिकी विधि ...... १००१ | २८५- विश्वचक्र-दानकी विधि ...... १०७१ |
| २८६- कनककल्पलता-दानकी विधि ...... १०७३ | |
| २६२- पीठिकाओंके भेद, लक्षण और फल ..... १००५ | २८७- सप्तसागर-दानकी विधि ...... १०७५ |
| २६३- लिङ्गके निर्माणकी विधि ...... १००७ | २८८- रत्नधेनु-दानकी विधि ...... १०७६ |
| २४६- प्रतिमा-प्रतिष्ठाके प्रसङ्गमें यज्ञाङ्गरूप कुण्डादिके निर्माणकी विधि ...... १०१० | २८९- महाभूतघट-दानकी विधि ...... १०७८ |
| २९०- कल्पानुकीर्तन ...... १०७९ | |
| २९१- मत्स्यपुराणकी अनुक्रमणिका ...... १०८२ | |
| पुराण-श्रवण-कालमें पालनीय धर्म ...... १०८४ |