भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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७८ मयमतम् उसमें सभी देवों के मन्दिर, नाना प्रकार की गणिकायें एवं बहुत से उद्यान होते हैं।।२३।। हस्त्यश्वरथपदातिबहुमुख्या सर्वजनयुक्ता। द्वारोपद्वारयुताभ्यन्तरतोऽनेकजनवासा ॥२४॥ यहाँ गज, अश्व, रथ एवं पैदल सैनिक होते हैं। सभी प्रकार के एवं सभी वर्ण के लोग निवास करते हैं। इस नगर में द्वार एवं उपद्वार (छोटे प्रवेशद्वार ) होते हैं। नगर के भीतर अनेक प्रकार के जनावास होते हैं।।२४।। या नृपवेश्मसमेता सा कथिता राजधानीति । काननवनदेशे वा सर्वजनावाससङ्कीर्णम् ॥२५॥ क्रयविक्रयकैर्युक्तं पुरमुदितं यत्तदेव नगरमिति । इस प्रकार का राजभवन से युक्त नगर राजधानी कहलाता है। जो वन-प्रदेश में स्थित होता है, जहाँ सभी प्रकार के लोग बसते हैं एवं क्रय-विक्रय के स्थल ( हाट, बाजार ) से युक्त पुर को नगर कहते हैं।।२५।। ✵ खेटादिभेदाः ✵ शूद्रैरधिष्ठितं यन्नद्यचलावेष्टितं तु तत्खेटम् ॥२६॥ नदी अथवा पर्वत से घेरे एवं शूद्रों के निवास से युक्त स्थान को खेट कहते हैं।।२६।। परितः पर्वतयुक्तं खर्वटकं सर्वजनसहितम्। खर्वटखेटकमध्ये यज्जनताढ्यं जनस्थानकुब्जम् ॥२७॥ चारो ओर पर्वत से घिरे हुये, सभी वर्णों के आवास से युक्त स्थान को खर्वटक कहते हैं। खेट एवं खर्वट के मध्य स्थित घनी जनसंख्या वाले स्थान को कुब्ज कहते हैं।।२७।। द्वीपान्तरागतवस्तुभिरभियुक्तं सर्वजनसहितम् । क्रयविक्रयकैर्युक्तं रत्नधनक्षौमगन्धवस्वाढ्यम् ॥२८॥ सागरवेलाभ्याशे तदनुगतायामि पत्तनं प्रोक्तम्। अन्य द्वीपों से आये हुये वस्तुओं से युक्त, सभी प्रकार के लोगों से युक्त, क्रय- विक्रयस्थल से युक्त, रत्न, धन, सिल्क के वस्त्रों से युक्त तथा विविध प्रकार के सुगन्धियों ( इत्र आदि ) से युक्त, सागर-तट पर स्थित एवं उससे सम्बद्ध नगर को पत्तन कहते हैं।।२८।।