मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदशमोऽध्यायः 卐 नगरविधानम् ९१ परितः पर्वतैर्युक्तं नानाजातिगृहैर्वृतम्। सर्वप्रचारसंयुक्तमेतत्खर्वटमीरितम् ।।३०।। कुब्जक खेट एवं खर्वट के मध्य में स्थित होता है। सभी वर्णों के लोगों का आवास होता है एवं इसमें वप्र निर्मित नहीं होता है— खेटखर्वटयोर्मध्ये सर्वमर्त्यालयान्वितम्। वप्राभावस्वते तत्तु कुब्जकमुदाहृतम्।।३१।। पत्तन समुद्रतट पर स्थित नगर है। यहाँ सभी वर्णों के लोग निवास करते हैं। अन्य द्वीपों से लाये गये शिल्क एवं कपूर आदि पदार्थों से व्यापारी-वर्ग यहाँ व्यापार करता है— अब्धितीरप्रदेशे तु नानाजातिगृहैर्वृतम्। वणिग्जातिभिराकीर्णं क्रयविक्रयपूरितम्।। रत्नैर्दीपान्तरैर्नीतैः क्षौमैः कर्पूरकादिभिः। एतत्पत्तनमाख्यातं वप्रायतसमन्वितम्।।३२-३३।। (ग) विश्वकर्मवास्तुशास्त्र में खेट एवं खर्वट का उल्लेख ग्राम के अन्तर्गत किया गया है। खेट प्रायः वन के मध्य में होता है। यहाँ शबर, पुलिन्द एवं मांस से जीवन- यापन करने वाले निवास करते हैं। इसमें गृह प्रायः पर्णनिर्मित (कुटिया) तथा कहीं- कहीं ईंटों के गृह होते हैं। इसमें एक से लेकर दश तक वीथियाँ एवं अनेक क्षुद्रवीथियाँ होती हैं— खेटस्य वास्तुभूमिस्तु प्रायः काननमध्यगाः। शबरैश्च पुलिन्दैश्च संयुता मांसजीविभिः।। पर्णगेहान्विता विष्ण्वगथ वेष्टिकगेहभाक्। एकादशवीथ्यन्ताः क्षुद्रवीथ्यस्समन्ततः।। (८.२०-२१) खर्वट नदी के किनारे बसा स्थान है। यह आम, साल आदि वृक्षों से युक्त होता है। इसमें दश से बीस वीथियाँ एवं अनेक क्षुद्रवीथियाँ होती हैं। एक सौ गृहों से युक्त एक मुख्य वीथी होती है, जहाँ कालिका मन्दिर होता है। यहाँ कृषक, श्रमिक, मदिरागृह एवं बाजार होते हैं— वास्तुभूमिः खर्वटस्य नदीतीरगता मता। रसालसालवकुलैस्तिन्त्रिणीवेणुपाटलैः ।। कदम्बैर्नारिकेलैश्च श्रीपर्णैस्तिलकेरपि। छायावृक्षसमाकीर्णा निष्कुटारामसंवृता।।