मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
DevanagariHindipublished395 पृष्ठ
पृष्ठ 119, कुल 395 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 119
दशमोऽध्यायः 卐 नगरविधानम् ९५ ईशान में रङ्गरेज, जुलाहे, धोबी; आग्नेय कोण में अग्निजीवी ( धातुशिल्पी ); अन्त्यज, चर्मकार, वरड, सुराजीवी एवं वेश्याओं को नैर्ऋत्य कोण तथा वायव्य कोण में व्याध को बसाना चाहिये— ईशे रङ्गकराः कुविन्दरजकाः वह्नौ च तज्जीविनः प्रोक्ता अन्त्यजचर्मकारबरडाः स्युः शौण्डिकाः राक्षसे। पण्यस्त्री निर्ऋतौ च मारुतयुते कोणे न्यसेल्लुब्धकान् ॥१९॥