मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्दशोऽध्यायः 卐 अधिष्ठानविधानम् १२९ प्रतिक्रमं तत् सुरमन्दिरोचितं विचित्रितं पत्रलतादिरूपकैः । द्विजन्मभूमीश्वरयोर्मतं गृहे शुभप्रभं पुष्टिकरं जयावहम् ॥२४॥ इस प्रकार सुसज्जित प्रतिक्रम अधिष्ठान देवालय के लिये प्रशस्त होता है। जब इस पर पत्र एवं लतादिकों का अंकन किया जाता है, तब वह ब्राह्मण एवं राजाओं के गृह के अनुरूप होता है; साथ ही उन्हें शुभ, समृद्धि तथा विजय प्रदान करता है॥२४॥ ✵ पद्मकेसरम् ✵ एकद्वयेकेन षड्भिः शशिशिवशशिभिर्वेदचन्द्रैकभागै- र्द्व्यंशैकेनांशनेत्रैः शिवशशिसमभागेन जन्माब्जकं च । वप्रं पद्मं गलाब्जं कुमुदमुपरि पद्मं च कम्पं गलं तत् कम्पं पद्मं च पट्टीकमलमुपरिकम्पं च षड्विंशदंशे ॥२५॥ पद्मकेसर अधिष्ठान—पद्मकेसर अधिष्ठान के छब्बीस भाग (ऊँचाई में) किये जाते हैं। इसमें जन्म एक भाग, अब्जक दो भाग, वप्र एक भाग, पद्म छः भाग, गल एक भाग, अब्ज एक भाग, कुमुद एक भाग, पद्म चार भाग, कम्प एक भाग, गल एक भाग, कम्प दो भाग, पद्म एक भाग, पट्टी दो भाग, कमल एक भाग एवं कम्प एक भाग होता है॥२५॥ पद्मकेसरमेतदुदाहृतं कम्पवाजनपङ्कजकैर्युतम् । कुम्भवप्रयुतञ्च सकन्धरं शम्भुधामनि तत्प्रविधीयते ॥२६॥ यह अधिष्ठान पद्मकेसर है। इस पद्मकेसर अधिष्ठान में कम्पवाजन, पङ्कज, कुम्भ, वप्र और कन्धर जब युक्त हो जाते हैं तो यह शम्भु-मन्दिर के अनुकूल हो जाता है॥२६॥ ✵ पुष्पपुष्कलम् ✵ भागेष्वेकार्धकार्धैस्तदुपरि चतुरंशैस्तथार्धांशकार्धै- र्द्व्यर्द्धांशार्धद्विभागैस्तदुपरि च तथार्धांशकार्धेन जन्मम् । वप्रं कञ्जं गलाब्जं तदुपरि कुमुदं पङ्कजं कम्पकण्ठं कम्पं पद्मं महावाजनमुपरिदलं कम्पकं पङ्कजाढ्यम् ॥२७॥ पुष्पपुष्कलमेतदुदाहृतं कल्पितं नवपङ्क्तिभिरुच्छ्रये । शिल्पिभिः प्रस्रवैरपि पूजितामूर्ध्वमध्यममुखे विमानके ॥२८॥ पुष्पपुष्कल अधिष्ठान—पुष्पपुष्कल अधिष्ठान की ऊँचाई को उन्नीस भागों में मय०-९