भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

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चतुर्दशोऽध्यायः 卐 अधिष्ठानविधानम् १३१ ✵ श्रीकान्तम् ✵ आलिङ्गयुक्तमथ चान्तरितप्रतीभ्यां तद्वाजनेन च वियुक्तकमेतदेव। श्रीकान्तनामकमसूरकमष्टकोणं वृत्तं तु वा कुमुदम्बरमार्गिणां तत्॥३२॥ श्रीकान्त अधिष्ठान—जब अधिष्ठान आलिङ्ग एवं अन्तरित प्रति से युक्त हो एवं वाजन से रहित हो तो उसे श्रीकान्त कहते हैं। इसका कुमुद अष्टकोण अथवा वृत्ताकार हो सकता है एवं यह अम्बरमार्गियों के अनुकूल होता है॥३२॥ ✵ श्रेणीबन्धम् ✵ एकद्व्येकर्तुवेदैः शशिनयनशिवद्व्येकदृक्चन्द्रसार्धा- र्धशैलैर्जन्माब्जकम्पं जगतिकुमुदकं कम्पकण्ठं च कम्पम्। पद्मं पट्टं च कण्ठं तदुपरि च तथा वाजनाब्जं च पट्टं श्रेणीबन्धं सुराणामुदितमिदमलं तुङ्गषड्विंशदंशे ॥३३