मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ पञ्चदशोऽध्यायः ( पादप्रमाणद्रव्यपरिग्रहविधानम् ) ☀ स्तम्बलक्षणम् ☀ पादायामं सविस्तारमाकारं भूषणादिकम् । लक्षणान्तरतः सम्यग् वक्ष्ये संक्षेपतः क्रमात् ॥१॥ स्तम्भ के लक्षण—मैं ( मय ऋषि ) अन्य लक्षणों के साथ स्तम्भों की लम्बाई, चौड़ाई, आकृति एवं उनके अलङ्करण आदि का संक्षेप में सम्यक् रूप से क्रमशः वर्णन कर रहा हूँ॥१॥ स्थाणुः स्थूणश्च पादश्च जङ्घा च चरणोऽङ्घ्रिकः । स्तम्भश्च तलिपः कम्पः पर्यायवचनानि हि ॥२॥ स्थाणु, स्थूण, पाद, जङ्घा, चरण, अङ्घ्रिक, स्तम्भ, तलिप एवं कम्प ( स्तम्भ के ) पर्यायवाची शब्द हैं॥२॥ ☀ स्तम्भमानम् ☀ सवितस्त्यष्टहस्तोच्चं द्वादशक्ष्माद्यपादकम् । तत्तद्वितस्तिहीनेन त्रिकरं चान्त्यभूमिके ॥३॥ स्तम्भ का प्रमाण—बारह तल के भवन में भूतल पर बनने वाले स्तम्भ की ऊँचाई आठ हाथ एक बित्ता ( साढ़े आठ हाथ ) होनी चाहिये। प्रत्येक तल पर एक- एक बित्ता कम करते हुये सबसे ऊपर के तल पर तीन हाथ ऊँचाई होनी चाहिये॥३॥ आत्तोत्सेधांशमानेन पादोच्चं वा विधीयते । आत्ताधिष्ठानतुङ्गस्य द्विगुणं पादतुङ्गकम् ॥४॥ अथवा स्तम्भ की ऊँचाई का मापन दिये गये माप से ( दूसरे ढंग से ) करना चाहिये। अधिष्ठान की ऊँचाई का दुगुना माप स्तम्भ का रखना चाहिये॥४॥ द्विगुणादधिकोत्सेधः स्तम्भः प्रोक्तः स्वयम्भुवा । अष्टविंशतिमात्रैस्तु मूलभूस्तम्भवस्तृतम् ॥५॥ ( बारह तल के भवन में ) स्वयम्भू के अनुसार स्तम्भ की ऊँचाई अधिष्ठान