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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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१४२ मयमतम् है। मूल में शेष भाग चौकोर होता है। इस स्तम्भ को चित्रखण्ड कहते हैं। इसी में यदि मध्य पट्ट अष्टकोण हो तो उसे श्रीखण्ड स्तम्भ कहते हैं।।२२-२५।। मध्यपट्टं कलास्रं चेच्छ्रीवज्रस्तम्भमुच्यते । अग्राकारं युगास्रं स्यात्त्रिपट्टक्षेपणांवितम् ।।२६।। क्षेपणस्तम्भमित्युक्तं पट्टं पत्रादिशोभितम् । ऊर्ध्वाधस्ताच्छिखामानं त्रिचतुर्भागमेव वा ।।२७।। सर्वे पोतिकया युक्ता नानारूपैर्विचित्रिताः । उपर्युक्त स्तम्भ में यदि मध्य पट्ट सोलह कोण हो तो उसकी संज्ञा श्रीवज्र होती है। ( क्षेपण स्तम्भ के ) अग्र भाग की आकृति चौकोर होती है। जिसमें तीन पट्ट से युक्त क्षेपण निर्मित होता है, उसे क्षेपण स्तम्भ कहते हैं। इसके पट्ट पत्र आदि से अलंकृत होते हैं। उसके नीचे तीन अथवा चार भाग में शिखा का मान रखा जाता है। सभी स्तम्भ पोतिका से युक्त एवं विभिन्न प्रकार की