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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 395 में से

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पृष्ठ 173

"( इस वर्ग के वृक्ष भी भवन के लिये अग्राह्य होते हैं )।।७३।।" - wait, look at the line breaks: Line 26: "वायु द्वारा तोड़ा गया, गजों द्वारा तोड़ा गया, समाप्त जीवन वाला, चण्डालवर्ग" Line 27: "के लोगों को शरण देने वाला तथा जिस वृक्ष के नीचे ( चण्डालवर्ग को छोड़ कर )" Line 28: "अन्य सभी वर्ग के लोग शरण लेते हों ( इस वर्ग के वृक्ष भी भवन के लिये अग्राह्य" Line 29: "होते हैं )।।७३।।" Let's check line 28-29 carefully in the image: Line 28 ends with: "अन्य सभी वर्ग के लोग शरण लेते हों ( इस वर्ग के वृक्ष भी भवन के लिये अग्राह्य" Line 29: "होते हैं )।।७३।।" Yes! Exactly.

Now verse 74: "नान्योन्यवलिता भग्ना न वल्मीकसमाश्रिताः ।" "न लतालिङ्गिता गाढा न सिराकोटरावृताः ॥७४॥" Wait, look at the text of verse 74 in the image: First line: "नान्योन्यवलिता भग्ना न वल्मीकसमाश्रिताः ।"

  • नान्योन्यवलिता (ना, न्यो, न्य