मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०८ मयमतम् निश्छिद्रमिष्टमानेन गोत्रमिष्टकया दृढम्। पूर्वोक्तानां च पञ्चानां विधातव्यं पृथक् पृथक् ॥९७॥ पूर्ववर्णित कराल, मुद्दी आदि पदार्थों का प्रयोग अलग-अलग करना चाहिये। इनसे ईंटों को आपस में इस प्रकार जोड़ा जाता है; जिससे उनमें छिद्र शेष न रहें। तत्र तत्र तदुक्तेन द्रव्येण परिकल्पयेत् । केवलेनाम्भसा पूर्वं पूर्वांस्त्रिस्त्रिः प्रकुट्टयेत् ॥९८॥ उपर्युक्त पदार्थों में से किसी एक का चुनाव करना चाहिये। (चुने गये पदार्थ को ) केवल जल के साथ पहले तीन बार कूटना चाहिये ॥९८॥ क्षीरद्रुमकदम्बाश्राभयाक्षत्वग्जलैः पुनः। त्रिफलोदैस्ततस्तद्वन्माषयूषैस्ततस्तथा ॥९९॥ इसके पश्चात् क्षीरद्रुम, कदम्ब, आम, अभया (हर्र) तथा अक्ष (बहेड़ा) के छाल के जल के साथ, इसके पश्चात् त्रिफला (हर्र, बहेड़ा एवं आँवला) के जल के साथ, तदनन्तर उड़द के पानी के साथ (कूटा जाता है) ॥९९॥ संयम्य शर्कराशुक्तिं चूर्णं तत्खातवारिणि । खुरसङ्कुट्टनं कृत्वा स्रावयित्वाऽथ वाससा ॥१००॥ इसके पश्चात् कङ्कड़, सीपियाँ एवं चूने में कूप का (अथवा गड्ढे का) जल मिला कर खुर से विधिवत् कुटाई करना चाहिये। पुनः इसको कपड़े से छानना चाहिये ॥१००॥ कल्कं च चिक्कणं तेन कल्कनीयं विचक्षणैः । दधिदुग्धमाषयूषगुडाज्यकदलीफलैः ॥१०१॥ जलैश्च नालिकेरस्य चूतपक्वरसैः सह। कल्पितं शिल्पिभिर्यत्तद् बन्धोदकमिति स्मृतम् ॥१०२॥ इस (तरल पदार्थ) से कल्क एवं चिक्कण को बुद्धिमान (स्थपति) को तैयार करना चाहिये। दही, दूध, उड़द का पानी, गुड़, घी, केला, नारियल का पानी एवं पके आम का रस-इन पदार्थों का उचित मात्रा में संयोजन कर शिल्पी लोग 'बन्धोदक' तैयार करते हैं ॥१०१-१०२॥ शुद्धिं शुद्धोदकेनादौ कृत्वा बन्थाम्भसा ततः । आलिप्य सुधया कार्या नानारूपान्वितक्रिया ॥१०३॥ प्रथमतः साफ पानी से (भित्ति आदि) स्थान को शुद्ध कर (साफ कर) पुनः बन्धोदक का लेप करना चाहिये। लेप के पश्चात् सुधा से लेप करके विभिन्न प्रकार के