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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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२१८ मयमतम् युक्त्या सर्वेषां करालादिबन्धं प्रोक्तं सम्यक् चेष्टकाबन्धमूर्ध्वे ॥१६३॥ इस प्रकार अलङ्कारों से युक्त ग्रीवा, पद्म की आकृति, मल्लों का प्रमाण एवं शीर्ष-स्थान के अलङ्करण का निर्माण करना चाहिये। उचित रीति से कराल आदि से बन्ध ( ईंटों को जोड़ने का गारा ) बना कर ऊर्ध्व भाग में भली-भाँति ईंटों को जोड़ना चाहिये।। १६३ ।। ⁕ स्तूपिकीलवृक्षाः ⁕ खदिरसरलसालस्तम्बकाशोकवृक्षाः पनसतितिमिसनिम्बाः सप्तपर्णाश्च सर्वे । परुषवकुलवह्विक्षीरिणीत्येवमाद्याः सुदृढविमलसाराः स्तूपिकीलाः प्रसिद्धाः ॥१६४॥ स्तूपिका-कील के वृक्ष—स्तूपिकील के लिये प्रसिद्ध वृक्ष कत्था, चीड़, साल, स्तबक, अशोक, कटहल, तिमिस, नीम, सप्तपर्ण—ये सभी वृक्ष तथा परुष, वकुल, वहिन

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