भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

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एकोनविंशोऽध्यायः 卐 एकभूमिविधानम् २३३ आलयं निलयं वासमास्पदं वस्तु वास्तुकम्। क्षेत्रमायतनं वेश्म मन्दिरं धिष्ण्यकं पदम् ॥११॥ लयं क्षयमगारं च तथोदवसितं पुनः। स्थानमित्येवमुक्ताश्च पर्यायाख्या हि पण्डितैः ॥१२॥ भवन के पर्यायवाची नाम—विद्वानों के अनुसार भवन के पर्यायवाची शब्द ये हैं—विमान, भवन, हर्म्य, सौध, धाम, निकेतन, प्रासाद, सदन, सद्म, गेह, आवासक, गृह, आलय, निलय, वास, आस्पद, वस्तु, वास्तुक, क्षेत्र, आयतन, वेश्म, मन्दिर, धिष्ण्यक, पद, लय, क्षय, अगार, उदवसित तथा स्थान॥१०-१२॥ ❋ गर्भगृहमानम् ❋ हर्म्यतारत्रिभागैकं भूतांशेषु गुणांशकम्। धातुभागे युगांशः स्याद्बाणांशं नवभागिके ॥१३॥ रुद्रांशे रसभागं तु धातु त्रयोदशांशके। तिथ्यंशे वसुभागं तु सप्तदश नवांशकम् ॥१४॥ विस्तारार्धं तु ते सर्वे नालीगृहविशालताः। गर्भगृह=प्रधान भूतिकक्ष का मान—विस्तार में गर्भगृह का प्रमाण मन्दिर के प्रमाण के तीन भाग में एक भाग, पाँच भाग में तीन भाग, सात में चार भाग, नौ में पाँच भाग, ग्यारह में छः भाग, तेरह में सात भाग, पन्द्रह में आठ भाग, सत्रह में नौ भाग या आधा होना चाहिये॥१३-१४॥ ❋ स्तूपिकामानम् ❋ फलिके पञ्चभागे तु युगार्धं पद्मविस्तृतम् ॥१५॥ पद्मतारत्रिभागैकं कुम्भतारमिति स्मृतम्। कुम्भतारत्रिभागैकं कुम्भस्याधो वलग्नकम् ॥१६॥ वलग्नस्य त्रिभागैकं कुम्भस्योपरि कन्धरम्। कन्धरत्रिगुणं पाली तत्रिभागेन कुड्मलम् ॥१७॥ स्तूपिका का प्रमाण—फलिक के पाँच भाग में दो भाग के बराबर पद्म की चौड़ाई रखनी चाहिये। पद्म की चौड़ाई के तीसरे भाग के बराबर कुम्भ की चौड़ाई रखनी चाहिये। कुम्भ के विस्तार के तीसरे भाग के बराबर कुम्भ के नीचे वलग्न का मान होना चाहिये। वलग्न के तीसरे भाग के बराबर कुम्भ के ऊपर कन्धर होना चाहिये। कन्धर का तीन गुना पाली का प्रमाण एवं उसके तीसरे भाग के बराबर कुड्मल का मान होना चाहिये॥१५-१७॥