मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३४ मयमतम् समं त्रिपादमर्धं वा महानासीविनिर्गमम् । तद्व्यासत्रिचतुर्भागहीनं स्कन्धान्ततुङ्गकम् ॥१८॥ महानासी (सजावटी खिड़की) का विनिर्गम (निर्माणयोजना शिखर के विशिष्ट भाग के) बराबर, तीन चतुर्थांश अथवा आधा चौड़ा होना चाहिये। इसकी ऊँचाई उसकी चौड़ाई से तीन या चार भाग कम एवं स्कन्ध के अन्तिम भाग तक रखनी चाहिये।।१८।। शक्तिध्वजं तदर्धोच्चं त्रिपादं वा विधीयते । कन्थरोच्चत्रिभागैकं वेदिकोदयमीरितम् । सार्धदण्डं द्विदण्डं वा क्षुद्रनास्या विशालकम् ॥१९॥ शक्तिध्वज को उसका आधा ऊँचा अथवा तीन चौथाई प्रमाण का होना चाहिये। कन्धर की ऊँचाई के तीसरे भाग से वेदिका का उदय (प्रारम्भ) कहा गया है। क्षुद्रनासा (छोटी सजावटी खिड़की) की चौड़ाई आधा दण्ड या दो दण्ड होनी चाहिये।।१९।। ✺ द्वारम् ✺ पादोत्सेधे पङ्क्तिनन्दाष्टभागे द्वारोत्सेधं तत्तदेकांशहीनम् । विस्तारं स्यात्तदुच्छ्रार्धमानं द्वारं कुर्याद्धर्म्यमध्ये नृपाणाम् ॥२०॥ द्वार की ऊँचाई स्तम्भ की ऊँचाई के दश भाग में नौ भाग, आठ में नौ भाग या सात में आठ भाग के बराबर होनी चाहिये। इसकी चौड़ाई ऊँचाई की आधी होनी चाहिये। राजभवन के मध्य भाग में द्वार होना चाहिये।।२०।। योगव्यासं पादविष्कम्भमानं पादाधिक्यं वा तदर्धं त्रिपादम् । बाहुल्यं स्यादुच्छ्रये वेदभागे बाह्ये साब्जक्षेपणं तत्रिभागैः ॥२१॥ द्वार के पाख (चौखट का पार्श्व) की चौड़ाई स्तम्भ के बराबर अथवा उससे चतुर्थांश अधिक होनी चाहिये एवं उसकी मोटाई चौड़ाई की आधी या तीन चतुर्थांश होनी चाहिये। बाहरी भाग में द्वार का बाहुल्य पद्मों से सुसज्जित होना चाहिये एवं इसकी मोटाई चौड़ाई के तीन चतुर्थांश भाग के माप की होनी चाहिये।।२१।। भित्तिव्यासे द्वादशांशे तु बाह्ये पञ्चांशान्तद्वारयोगस्य मध्यम् । तद्वच्चान्तः स्तम्भमध्यं तयोस्त न्मध्यं प्रोक्तं भित्तिमध्यं विधिज्ञैः ॥२२॥ भित्ति के व्यास के बाहरी भाग के बारह भाग करने चाहिये। पाँचवें भाग में द्वार-