भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

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विंशोऽध्यायः 卐 द्विभूमिविधानम् २४७ तदूर्ध्वं कुड्यचरणसमपादाम्बुजासनम्। अखण्डकलशं कुर्यात्पद्मं कुम्भलतान्वितम्।।१४।। तस्याः कुम्भलता संज्ञा सैव खण्डोपरि क्रमात्। नक्रतोरणविन्यस्ता स्तम्भकुम्भलता मता।।१५।। ३. सञ्चित आदि भवन-भेद सञ्चित आदि भवन-भेदों का वर्णन मानसार ( १९ अ. ) में प्राप्त होता है— आसनं सञ्चितं प्रोक्तं स्थानकं स्यात्त्वसञ्चितम् ।।५।। अपसञ्चितंशयनं चेत्स्यात्तत्रिविधहर्म्यके ।।६।।