भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 395 में से

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द्वितीयोऽध्यायः 卐 वस्तुप्रकारः ५ प्रत्येक वर्ण ( ब्राह्मणादि ) के अनुसार भूमि का वर्णन किया गया है। इस दृष्टि से भूमि क्रमशः दो प्रकार की होती है—गौण एवं अङ्गी ( प्रधान ) ॥५॥ ग्रामादीन्येव गौणानि भवन्त्यङ्गी मही मता। सभा शाला प्रपा रङ्गमण्डपं मन्दिरं तथा ॥६॥ भूमि अङ्गी होती है तथा ग्रामादि गौण के अन्तर्गत आते हैं। सभागार, शाला, प्रपा ( प्याऊ ), रङ्गमण्डप एवं मन्दिर ( प्रासाद होते हैं ) ॥६॥ प्रासाद इति विख्यातं शिबिका गिल्लिका रथम्। स्यन्दनं चैवमानीकं यानमित्युच्यते बुधैः ॥७॥ इन्हें प्रासाद कहते हैं। शिबिका, गिल्लिका, रथ, स्यन्दन एवं आनीक को यान कहा जाता है॥७॥ मञ्चं मञ्चिलिका काष्ठं पञ्जरं फलकासनम्। पर्यङ्कं बालपर्यङ्कं शयनं चैवमादिकम् ॥८॥ शयन के अन्तर्गत मञ्च ( सिंहासन ), मञ्चिलिका ( दीवान ), काष्ठ ( काठ के आसन ), पञ्जर ( पिंजरा ), फलकासन ( बेञ्च ), पर्यङ्क ( पलंग ), बालपर्यङ्क आदि ग्रहण किये जाते हैं॥८॥ ☀ भूप्राधान्ये हेतुः ☀ चतुर्णामधिकाराणां भूरेवादौ प्रवक्ष्यते। भूतानामादिभूतत्वादाधारत्वाज्जगत्स्थितेः ॥९॥ उपर्युक्त चारो में प्रथम स्थान भूमि का कहा जाता है; क्योंकि भूतों ( पञ्च महा- भूतों ) में प्रथम स्थान भूमि का है, संसार की स्थिति इसी पर है एवं यही सबका आधार है॥९॥ ☀ वर्णानुरूपा भूमिः ☀ चतुरस्रं द्विजातीनां वस्तु श्वेतमनिन्दितम्। उदुम्बरद्रुमोपेतमुत्तरप्रवणं वरम् ॥१०॥ ब्राह्मणों के लिये प्रशस्त भूमि के लक्षण इस प्रकार हैं—भूमि चौकोर ( लम्बाई- चौड़ाई का प्रमाण सम ) हो, मिट्टी का रंग श्वेत हो, उदुम्बर के वृक्ष से ( गूलर ) युक्त हो एवं भूमि का ढलान उत्तर दिशा की ओर रहे॥१०॥ कषायमधुरं सम्यक् कथितं तत् सुखप्रदम्। व्यासाष्टांशाधिकायामं रक्तं तिक्तरसान्वितम् ॥११॥

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