मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयोऽध्यायः 卐 भूपरीक्षा ९ मधुरा षड्रसोपेता सर्वसम्पत्करी धरा। प्रदक्षिणोदकवती वर्णगन्धरसैः शुभा ॥६॥ एवं मीठी—इन छः स्वादों वाली भूमि सभी प्रकार की सम्पत्तियाँ प्रदान करती है। रंग, गन्ध एवं स्वाद से युक्त जिस भूमि पर जलधारा का प्रवाह दाहिनी ओर हो, वह भूमि शुभ होती है।।६।। पुरुषाञ्जलिमात्रे तु दृष्टतोया मनोरमा। निष्कपाला निरुपला कृमिवल्मीकवर्जिता ॥७॥ (उत्खनन करने पर) पुरुषाञ्जलि-प्रमाण (पुरुष-प्रमाण) पर जल दिखाई पड़े, मन को अच्छी लगने वाली, कपालास्थि-विहीन, कंकड़-पत्थररहित, कीटों एवं दीमक की बाँबी आदि से विहीन—।।७।। अस्थिवर्ज्या नसुषिरा तनुवालुकसंयुता। अङ्गारैर्वृक्षमूलैश्च शूलैश्चापि पृथग्विधैः ॥८॥ हड्डी आदि से रहित, छिद्ररहित, महीन बालू वाली, जले कोयले, वृक्ष के मूल एवं किसी प्रकार के शूल से रहित—।।८।। पङ्कसङ्करकूपैश्च दारुभिलोष्टकैरपि। शर्कराभिरयुक्ता या भस्माद्यैस्तु तुषैरपि ॥९॥ कीचड़, धूल, कूप, काष्ठ, मिट्टी के ढेले एवं बालू, राख आदि से तथा भूसे से रहित—।।९।। निन्द्या भूः सा शुभा सर्ववर्णानां सर्वसम्पत्करी धरा। दध्याज्यमधुगन्धा च तैलासृग्गन्धिका च या ॥१०॥ भूमि सभी वर्ण वालों के लिये शुभ एवं समृद्धि प्रदान करने वाली होती है। जो भूमि दधि, घृत, मधु (मद्य), तेल तथा रक्त गन्ध वाली होती है (वह भी प्रशस्त होती है) ।।१०।। शवमीनपक्षिगन्धा सा धरा निन्दिता वरैः। सभाचैत्यसमीपस्था नृपमन्दिरसंश्रिता ॥११॥ शव, मछली एवं पक्षी के गन्ध वाली भूमि अग्राह्य होती है। इसी प्रकार सभागार, चैत्य (ग्राम का प्रधान वृक्ष) एवं राजभवन के निकट की भूमि गृहनिर्माण की दृष्टि से त्याज्य होती है।।११।।