मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१२ मयमतम् मञ्च, एक भाग से गल, तीन भाग से शिखर एवं शेष भाग से शिखा का प्रमाण रखना चाहिये। अब पाँच तल के गोपुर का वर्णन किया जा रहा है।।४४-४५।। ✺ पञ्चतलगोपुरम् ✺ स्तूप्यन्तमुत्तरान्तं च त्रयोविंशतिभागिकम् ।।४६।। द्विभागं प्रस्तरोच्चं स्यात्त्र्यंशार्धं चरणायतम्। पादोन द्वयंशकं मञ्चं पादायामं त्रियंशकम् ।।४७।। सार्धांशमूर्ध्वमञ्चोच्चं द्वयंशार्धं पाददैर्घ्यकम्। सपादांशं कपोतोच्चं द्वयंशं स्यात्तलिपायतम् ।।४८।। प्रस्तरोच्चं तु भागेन कन्धरं भागमिष्यते। द्वयंशार्धं शिखरोत्सेधं शेषं स्तूप्युच्छ्रयं भवेत् ।।४९।। पाँच तल का गोपुर—( पाँच तल के गोपुर के मान को ) स्तूपी से उत्तर पर्यन्तप्रमाण को तेईस भागों में बाँटना चाहिये। दो भाग से प्रस्तर की ऊँचाई, साढ़े तीन भाग से चरण ( दूसरा तल ), पौने दो भाग से मञ्च, तीन भाग से पाद ( तीसरा तल ), डेढ़ भाग से मञ्च, ढाई भाग से पाद ( चतुर्थ तल ), सवा एक भाग से कपोत, दो भाग से तलिप ( पाँचवाँ तल ), एक भाग से प्रस्तर, एक भाग से कन्धर, ढाई भाग से शिखर एवं शेष भाग से स्तूपी की ऊँचाई रखनी चाहिये ।।४६-४९।। ✺ षट्तलगोपुरम् ✺ उत्तरादिशिखान्तं स्यादेकोनत्रिंशदंशकम्। द्विभागं प्रस्तरोत्सेधं पादोच्चं चतुरंशकैः ।।५०।। पादोनद्वयंशकं मञ्चं त्र्यंशार्धं पाददैर्घ्यकम्। सत्रिपादांशकं मञ्चं त्रिभागं तलिपायतम् ।।५१।। सार्धांशं प्रस्तरोत्सेधं द्वयंशार्धं पाददैर्घ्यकम्। सपादांशं कपोतोच्चमूर्ध्वभागं द्विभागतः ।।५२।। प्रस्तरोच्चं तु भागेन कन्धरं तत्समं भवेत्। सार्धद्वयंशं शिरस्तस्माच्छेषभागं शिखोदयम् ।।५३।। एवं तु षट्तलं प्रोक्तं सप्तभौममथोच्यते। छः तल का गोपुर—( छः तल के गोपुर में ) उत्तर से शिखापर्यन्त प्रमाण को उन्तीस भागों में बाँटना चाहिये। दो भाग से प्रस्तर की ऊँचाई, चार भाग से पाद ( द्वितीय तल ), पौने दो भाग से मञ्च, साढ़े तीन भाग से पाद ( तीसरा तल ), पौने