मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशोऽध्यायः 卐 गोपुरविधानम् ३१३ दो भाग से मञ्च, तीन भाग से तलिप ( चतुर्थ तल ), डेढ़ भाग से प्रस्तर, ढाई भाग से पाद ( पाँचवाँ तल ), सवा एक भाग से कपोत, दो भाग से ऊर्ध्व भाग ( ऊपरी तल, छठवाँ तल ), एक भाग से प्रस्तर, एक भाग से कन्धर, ढाई भाग से शिरोभाग एवं शेष भाग से शिखाभाग की ऊँचाई रखनी चाहिये। इस प्रकार छः तल गोपुर का वर्णन किया गया। अब सात तल के गोपुर का वर्णन किया जा रहा है।।५०-५३।। ⁕ सप्ततलगोपुरम् ⁕ उत्तरादिशिखान्तं यन्मानं षट्त्रिंशदंशकम् ॥५४॥ मञ्चं साङ्घ्रिद्वयं सार्धवेदांशं पाददैर्घ्यकम् । द्विभागं प्रस्तरोत्सेधं पादोच्चं चतुरंशकम् ॥५५॥ सत्रिपादांशकं मञ्चं त्र्यंशार्धं चरणायतम् । पादोनद्व्यंशमञ्चोच्चं त्रिभागं पाददैर्घ्यकम् ॥५६॥ सार्धांशं प्रस्तरोच्चं तु द्व्यंशार्धं तलिपायतम् । सपादभागमञ्चोच्चमूर्ध्वपादं द्विभागिकम् ॥५७॥ कपोतोच्चं तु भागेन तत्समं कन्धरोदयम् । सत्रिपादाश्विनीभागं शिरःशेषं शिखोदयम् ॥५८॥ एवं भागानि कर्तव्यान्युर्वीसंख्याक्रमेण तु । सात तल का गोपुर—( सात तल के गोपुर के ) उत्तर से प्रारम्भ कर शिखा- पर्यन्त प्रमाण को छत्तीस भागों में बाँटना चाहिये। सवा दो भाग से मञ्च, साढ़े चार भाग से पाद ( द्वितीय तल ), दो भाग से प्रस्तर, चार भाग से पाद ( तृतीय तल ), पौने दो भाग से मञ्च, साढ़े तीन भाग से चरण ( चतुर्थ तल ), पौने दो भाग से मञ्च, तीन भाग से पाद ( पाँचवाँ तल ), डेढ़ भाग से प्रस्तर, ढाई भाग से तलिप ( छठवाँ तल ), सवा एक भाग से मञ्च, दो भाग से ऊर्ध्व पाद ( सातवाँ तल, ऊपरी तल ), एक भाग से कपोत, एक भाग से कन्धर, पौने तीन भाग से शिरोभाग एवं शेष भाग से शिखा की ऊँचाई रखनी चाहिये। इस प्रकार इस क्रम से गोपुरों का भाग निर्धारित करना चाहिये।।५४-५८।। ⁕ गोपुरविस्तारमानम् ⁕ विस्तारे पञ्चभागे तु नालीगेहं त्र्यंशकम् ॥५९॥ शेषं तु भित्तिविष्कम्भमेकभूमेर्विधीयते । गोपुर के विस्तार का प्रमाण—एक तल वाले गोपुर की चौड़ाई के पाँच भाग