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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 351, कुल 395 में से

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चतुर्विंशोऽध्यायः 卐 गोपुरविधानम् ३२७ विभिन्न तल वाले गोपुर ( श्लोक ३६-५८ ) विश्वकर्मवास्तुशास्त्र (अ. २८-३२ / ४-२९) में एक तल से प्रारम्भ कर नौ तल तक के गोपुरों का वर्णन प्राप्त होता है-- सप्तभौमं गोपुरं वा नवभौमयुतं तु वा। (विश्व. वास्तु., २८-३२/२९) गोपुरों के अलंकरण ( श्लोक ८१-८३ ) गोपुर के अलंकरणों के विषय में अन्य शिल्प-ग्रन्थों में भी वर्णन प्राप्त होता है। शिल्परत्न के अनुसार— मसूरकस्तम्भवैदिजालकैस्तोरणादिभिः ।। यथायुक्ति यथाशोभं युक्तमेव करोत्वतः। ( पूर्व.-४१.५५-५६ ) प्रकल्पयेद् दृढं शिल्पी यथाशोभं यथाबलम्। ( विश्व. वास्तु.-२८.३२/२८ )

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