भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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अथ पञ्चविंशोऽध्यायः ( मण्डपसभाविधानम् ) ✺ मण्डपविधानम् ✺ देवानां द्विजभूमीशवैश्यानां शूद्रजन्मनाम् । तत्तद्योग्यं यथायुक्त्या मण्डपं प्रविधीयते ॥१॥ मण्डप का विधान—देवों, ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों एवं शूद्रों के अनुकूल मण्डपों का वर्णन उचित रीति से किया जा रहा है॥१॥ ✺ मण्डपयोग्या देशाः ✺ प्रासादाभिमुखे पुण्यक्षेत्रे वारामके शुभे । ग्रामादिवस्तुमध्ये च चतुर्दिक्षु विदिक्ष्वपि ॥२॥ बाह्याभ्यन्तरतो वाऽपि गृहाणां मध्यमे मुखे । मण्डप के अनुकूल स्थान—( मण्डपों का स्थान ) प्रासाद ( देवालय ) के अग्र भाग में, पुण्यक्षेत्र ( तीर्थस्थल ) में, आराम ( उद्यान, पार्क ) में, ग्राम आदि वास्तु- क्षेत्र के बीच में, चारो दिशाओं एवं दिशाओं के कोणों में, गृहों के बाहर, भीतर, मध्य में एवं सामने होता है॥२॥ [L16