भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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पञ्चविंशोऽध्यायः 卐 मण्डपसभाविधानम् ३२९ जन-सामान्य के दर्शन हेतु विशेष अवसरों पर निर्मित मण्डप ), बलालौनक-मण्डप ( सैन्य कार्यसम्बन्धी मण्डप ), सन्धिकार्यार्हक मण्डप ( जिस मण्डप में सन्धि आदि से सम्बन्धित कार्य सम्पन्न हों ), क्षौर मण्डप ( जहाँ मुण्डन आदि कार्य सम्पन्न हों ) तथा भुक्तिकर्मसुखान्वित मण्डप ( जहाँ समूहभोज एवं सुख उठाया जाय )।।३-५।। ⁕ मण्डपनामानि ⁕ तेषां क्रमेण नामानि वक्ष्यन्ते विधिनाऽधुना । मेरुकं विजयं सिद्धं पद्मकं भद्रकं शिवम् ॥६॥ वेदं चालङ्कृतं दर्भं कौशिकं कुलधारिणम् । सुखाङ्गं सौख्यकं गर्भं माल्यं माल्याद्भुतं तथा ॥७॥ देवद्विजनरेन्द्राणां द्विरष्टचतुरस्रकम् । मण्डपों के नाम—अब उन मण्डपों के नामों का क्रमशः विधिपूर्वक उल्लेख किया जा रहा है। ये सोलह चतुष्कोण मण्डप हैं, जो देवों, ब्राह्मणों एवं राजाओं के लिये होते हैं। ( उनके नाम इस प्रकार हैं— ) मेरुक, विजय, सिद्ध, पद्मक, भद्रक, शिव, वेद, अलंकृत, दर्भ, कौशिक, कुलधारिण, सुखाङ्ग, सौख्यक, गर्भ, माल्य तथा माल्याद्भुत ।।६-७।। धनं सुभूषणाख्यं चाप्याहल्यं स्रुगकं तथा ॥८॥ कोणं च खर्वटं चैव श्रीरूपाख्यं च मङ्गलम् । एतान्यष्टौ सुरादीनां नृपाणामायतास्रकम् ॥९॥ मार्गं सौभद्रकं चैव सुन्दराख्यं तु मण्डपम् । साधारणं च सौख्यं च तथैवेश्वरकान्तकम् ॥१०॥ श्रीभद्रं सर्वतोभद्रमित्यष्टौ वैश्यशूद्रयोः । धन, सुभूषण, आहल्य, स्रुगक, कोण, खर्वट, श्रीरूप एवं मङ्गल—ये आठ आयाताकार मण्डप देवता आदि के एवं राजाओं के अनुकूल होते हैं तथा वैश्य एवं शूद्रों के अनुकूल मण्डपों के नाम इस प्रकार हैं—मार्ग, सौभद्रक, सुन्दर, साधारण, सौख्य, ईश्वरकान्त, श्रीभद्र तथा सर्वतोभद्र ।।८-१०।। भक्तिमानं तथा पादायामं पादविशालकम् ॥११॥ अधिष्ठानं तदाधारं प्रपां मध्यमरङ्गकम् । अलङ्कारं क्रमाद् वक्ष्ये स्तम्भपक्षं तदाकृतम् ॥१२॥ इनके स्तम्भों के भक्तिमान ( विभाजन का प्रमाण ), लम्बाई एवं चौड़ाई, इनके