मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ मयमतम् पूर्वभागजलोपेता तथाश्वत्थद्रुमान्विता। विपुला लोहयुग्भूमिः क्षत्रियाणां हितप्रदा।।१०।। वैश्यवर्णा भूमि— नातिकृष्णा न रक्ता च प्लक्षद्रुमसमन्विता। दक्षिणायां जलोपेता नातिनिम्नोन्नतस्थला।।११।। भूरियं वैश्यजातीनां बलसम्पत्करा मता। शूद्रा भूमि— कटुमृत्स्ना कृष्णवर्णा वटवृक्षसमन्विता।।१२।। वारुण्यामुदकोपेता शूद्राणां क्षेमकारिणी। इनके अतिरिक्त भूमि के उत्तम गुणों का वर्णन ( १४-२१ ) प्राप्त होता है एवं इसी के साथ भूमि के दोष ( २३-२७ ) भी वर्णित हैं, जिनमें भूकम्प से प्रभावित एवं अग्नि से दग्ध भूमि का परित्याग विशेष रूप से उल्लेखनीय है— कम्पेन भेदिता भूमिरग्निदग्धा च सर्वतः। ( ५-२७ ) अप्रशस्त भूमि की चर्चा समराङ्गणसूत्रधार ( ८.५२-६२ ) में विस्तार से प्राप्त होती है। अन्य वास्तुग्रन्थों में भी इस विषय पर प्रकाश डाला गया है।