मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमयमतम् २० छब्बीस हाथ की एक 'धनुर्मुष्टि' तथा सत्ताईस हाथ से एक 'धनुर्ग्रह' माप बनता है। यान (वाहन) तथा शयन (आसन एवं शय्या) में किष्कु माप तथा विमान में प्राजापत्य माप का प्रयोग होता है॥६॥ वास्तूनां तु धनुर्मुष्टिर्ग्रामादीनां धनुर्ग्रहः । सर्वेषामपि वास्तूनां किष्कुरे वाथवा मतः ॥७॥ वास्तुनिर्माण में 'धनुर्मुष्टि' माप का तथा ग्रामादि के मापन में 'धनुर्ग्रह' प्रमाण का प्रयोग होता है। अथवा सभी प्रकार के वास्तु-कर्म में 'किष्कु' प्रमाण का प्रयोग किया जा सकता है॥७॥ रत्निश्चैवमरत्निश्च भुजो बाहुः करः स्मृतः । हस्ताश्चतुर्धनुर्दण्डो यष्टिश्चैव प्रकीर्तितः ॥८॥ हस्त माप को 'रत्नि', 'अरत्नि', 'भुज', 'बाहु' एवं 'कर' कहते हैं। चार हस्त से 'धनुर्दण्ड' माप बनता है। इसी को 'यष्टि'