भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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५० मयमतम् को दूध में पका अन्न एवं घृत को बलिरूप में चढ़ाना चाहिये ।।१२।। लाजं धान्यं सविन्द्रस्य साविन्द्रे गन्धतोयकम् । बस्तमेदस्तथा मुद्गचूर्णमिन्द्रेन्द्रराजयोः ॥१३॥ लावा एवं धान्य सविन्द्र को, सुगन्धित जल साविन्द्र को, बकरी का मेद एवं मूँग का चूर्ण इन्द्र एवं इन्द्रराज को प्रदान करना चाहिये ।।१३।। रुद्रे रुद्रजये मांसं स्विन्नमापापवत्सयोः । कुमुदं मत्स्यमांसं च शङ्ककच्छपमांसकम् ॥१४॥ रुद्र एवं रुद्रजय को मांस तथा चर्बी, आप एवं आपवत्स को कुमुदपुष्प, मछली का मांस, शङ्कक ( शङ्ख के मध्य स्थित मांस ) एवं कछुये का मांस प्रदान करना चाहिये ।।१४।। मद्यमाज्यं चरक्यास्तु विदार्या लवणो बलिः । पूतनायास्तिलं पिष्टमन्याया मुद्गसारकम् ।।१५।। चरकी को मद्य एवं घृत, विदारी को लवण, पूतना को तिल एवं पिष्ट तथा पाप- राक्षसी को मूँग का सत्त्व प्रदान करना चाहिये ।।१५।। ✺ साधारणबलिः ✺ साधारणबलिः शुद्धभोजनं सघृतं दधि । सर्वेषामपि देवानां गन्धादीनि ददेत् क्रमात् ॥१६॥ सामान्य रूप से सभी देवों को प्रदान की जाने वाली बलि इस प्रकार है— साधारणं बलि घृत के सहित शुद्ध भोजन एवं दधि है। सभी देवों को क्रमशः गन्ध आदि प्रदान करना चाहिये ।।१६।। कन्यका वाऽथ वेश्या वा बलिधारणयोग्यकाः । अङ्गन्यासकरन्यासैः पूतचेता यथाक्रमम् ।।१७।। कन्या या वेश्या को बलि-पदार्थ धारण करने योग्य माना गया है। इन्हें अङ्गन्यास एवं करन्यास द्वारा पवित्र मन ( एवं शरीर ) वाली बनना चाहिये ।।१७।। ओङ्कारादिनमोऽन्तेन स्वस्वनामाभिधाय च । दत्वा पूर्वं जलं पश्चात् साधारणबलिं ददेत् ॥१८॥ वास्तुदेवों का क्रमानुसार नाम लेना चाहिये। उनके नाम से पूर्व 'ॐ' एवं नाम के पश्चात् 'नमः' लगाना चाहिये। उन्हें प्रथमतः जल एवं उसके पश्चात् साधारण बलि देनी चाहिये ।।१८।।