मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति ११५ २१ रसियो राम रिझास्या हे माय राणो जी मेवाडो म्हारो काई करसी । राणो रूससी गाव रखासी, हरि रूस्या कुम्हलास्या हे माय । गोपी चन्दन गगारी माटी, घसि घसि अग लगास्या हे माय । श्री तिलक तुलसी की माल, नित उठि मदिर जास्या हे माय । बाँध घूघरा निरत करा म्हे, कर सूँ ताल बजास्या हे माय । राणो भेज्यो विषरो प्यालो, चरणामृत करि पीस्या हे माय । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर हरि चरणा चित लास्या हे माय ॥१८४॥ पद सं० २० की द्वितीय पंक्ति के पूर्वाद्ध में निम्नांकित पाठ भेद मिलता है, 'हरि रूठ्या मर जास्या' । इस पाठ मे भी सर्प भेजे जाने की कथा का वर्णन नही मिलता। साथ ही, वैष्णव प्रभाव का विशेष स्पष्ट हो उठना इस पाठ की विशेषता है । २२ मेरे राणा जी मै गोविन्द गुण गाना । राजा रूठे नगरी राखै, हरि रूठ्या कहां जाना । राणा भेज्यो जहर पियाला अमृत कहि पी जाना । डबिया मे काला नाग भेजिया, सालगराम कर जाना । मीराँ बाई प्रेम दिवानी सांवरिया वर पाना ॥१८५॥