भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १७३ १३ तुम जीमों गिरधर लाल जी। मीराँ दासी अरज करै छे, सुनिए परम दयाल जी। छप्पन भोग छतीसो विजन,¹ पावो जन प्रतिपाल जी। राज भोग आरोगो² गिरधर, सनमुख राखो थाल जी। मीराँ दासी चरण उदासी, कीजै बेग निहाल जी। ॥२७२॥ पद के प्रारम्भ और अन्त मे मीराँ दासी का प्रयोग हुआ है। एक ही पद मे ऐसी पुनरुक्ति युक्त पद यह एक ही है। अन्तिम चरण मे “चरण उदासी” प्रयोग सम्भवत उदासी सम्प्रदाय के प्रभाव का द्योतक है। १४ तुम जीमो गिरधर लाल जू। मीराँ दासी अरज करै छै, मोकूँ करों निहाल जू। या बिरियां² है बालबोग की, लीज्यो चित मे धार जू। केसर अतर पुष्प के हरवा, इण विध करो सिणगार जू। छप्पन भोग छतीसो विंजन, लाई भर भर थाल जू। पान गिलोरी सुगध मिलाकर, कीनी है सब त्यार जू। मीराँ दासी परिक्रमा की, मौकूँ करौ निहाल जू। ॥२७३॥† उपर्युक्त दोनो पदो का गहरा साम्य विचारणीय है। सम्भवत दोनों ही पद एक दूसरे के गेय रूपान्तर हो। १५ पिया तेरे नाम लुभाणी हो। नाम लेत तिरता सुण्या, जैसे पाहण पाणी हो। सुगिरत कोइ न कियो, बहु करम कुमाणी हो। १ भोजन करो, २ समय।