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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१७४ मीरॉँ-बृहद्-पद-संग्रह गणिका कीर पढांवता, बैकुठ बसाणी१ हो। अरध नाम कुजर लियो, बाकी अवध घटाणी हो। गरुड़ छाडि हरि धाइया, पसु जून२ मिटाणी हो। नाम महातम गुरु दियो, परतीत३ पिछाणी हो। मीराँ दासी रावली, अपणी कर जाणी हो। ॥२७४॥ इस पद मे गुरु की चर्चा और पौराणिक गाथाओ का वर्णन मिलता है जिससे सत और वैष्णव , दोनो ही मतो का प्रभाव स्पष्ट हो उठता है। १६ कहो तो गुण गाऊ रे, भजै राम राम सुवा, कहो तो गुण गांऊ रे। सार की सलियाँ४ को सूवा, पींजरो बणाऊ रे। पींजरा मे आव सूवा, हाथ सूं हलाऊं रे। घीव कर घबिर सूवा, मो लापसी५ रधाऊं६ रे। आम ही को रस सूवा, घोल घोल पाऊ रे। कचन कोटि महल मन्दिर, मालिया झुकाऊ रे। मालिया मे आव सूवा, मोतिडा बधाऊ रे। बैठक करो तो सूवा, चादणी बिछाऊं रे। प्रेम ही प्रताप सूवा, झाझरी बजाऊं रे। जाई जाबूं केतकी सूवा, फूलडा सुंघावूं रे। केसर भरियो बाटको सूवा, अक चरचाऊ रे। मीराँ दासी सूवा राम की राती, चरणा ही चित लगाऊ रे। ॥२७५॥† १ बसा दिया, २ योनि, ३ विश्वास, ४ सीक, ५ गेहूँ से बनाया गया मीठा दलिया, ६ बना पाऊँ।

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