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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १७५ १७ नहि जाऊ सासरे, माई, म्हाने मिलिया छै सिरजणहार। सासू हरी सुमरना रे, सुसरो परम संतोष, जेठ जुगा रो राजवी, रे, पिंव रह्यो निरदोष। देवर के दोय डीकरी रे, दौन्यौ ही राजकुमारी, एकै सब जग मोह्यो री, एक रही ब्रह्मचारी। लाख चौरासी चुडलो रे वा'ला, पहिरियो पिया जी रे काज। बॉह पकड़ी हरी लै चाल्या, मोहि दिना छै अविचल राज। साधां मे म्हारो सासरो रे, पिया को बैकुठा बास। फेरि न काल मे आवस्यां जी, यूं गावै छै मीरा दास ॥२७६॥† इस तरह का एक पद गुजराती मे भी मिलता है। 'डीकरी' (पुत्री) जैसे शब्द से भी इस पद की भाषा पर गुजराती प्रभाव स्पष्ट हो जाता है। १८ दीजो म्हाने द्वारिका को बास, रूड़ा रणछोड़ जी हो। सुथान बासो नाम हरि को, माला लिये गुणकार। सकल तीरथ गोमती रे वा'ला, सावरियां सिरदार। पपैया ने मेघ पियारो, माछरी मध¹ नीर। म्हांनै तो गिरिधर ही पियारो, छाड़यो जगत सूं सीर। तजियो पीहर, सासरो तजियो, सहियो उपहास। राणा जी रो बस तजियो, राखो रावल² पास। मथुरा मे हरि जन्म लिया जी, कियो द्वारका बास। सहस गोप्या रे, बालमो, गावै मीरां दास् ॥२७७॥ १ बीच, २ तुम्हारे।