मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह पाठान्तर १, द्वारका रो बास दीज्यो, म्हाने द्वारका रो बास । सुथान बासो नाम हरिको, जिन रो भोज न पार । सकल तीरथ गोमती रे वाँ'ला, सावलिया सिरदार । पपीया ने मेघ प्यारो, मछली जल पास नीर । म्हाने तो म्हारो साहिब प्यारो, छाड़चो जगत को आस (पास) । तजियो पीहर, सासरो तज्यो, सब उपवास । राणा जी रो पासँ तजियो, राख्यो रावल पास । गोकुल सूं प्रभु मथुरा आये, भये द्वारिका बास । सहस गोप्या रो बालमो रे, गावै मीराँ दास । १९ द्वारिका को बास हो, मोहि द्वारका को बास । संख चक्र पद्म हूं ते, मिटे जग त्रास । सकल तीरथ गोमती मे करत निवास । सख झालरि झांझ बाजै, सदा सुख की रास । तजियो देसोबेस, पति गृह तज्यो, सम्पत्ति राजि । दासी मीराँ सरन आई, तुम्हे अब सब लाजि । ॥२७८॥ पाँचवी पंक्ति के द्वितीयार्द्ध का निम्नांकित पाठान्तर भी प्राप्त होता है .— “तजियो राणा राज” । उपर्युक्त दोनों पदो मे साम्य विचारणीय है । स्व० पुरोहित जी के शिष्य और सहयोगी पंडित सूर्य नारायण जी चतुर्वेदी के अनुसार यह पद किसी “मीराँ दास” कवि का प्रतीत होता है। इसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सम्भवत ऐसे “मीराँ दास” या “दासी मीराँ” प्रयोग युक्त सभी पद इन्ही उप- र्युक्त कवि के हो। यह “मीराँ दास” कवि कौन और कहा के थे ? इनका रचना काल क्या था ? आदि बातें जाने बिना इस विषय पर कुछ