मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"दासी" और "जन" प्रयोग युक्त पद १७७ कहना सर्वथा ही भ्रामक होगा। पद स० १७ और १८ तथा इनके पाठा- न्तर तथा और भी कुछ पद ऐसे मिलते है जिनमे (मीरा दास) प्रयोग मिलता है। अत इन्ही के आधार पर किसी नवीन सिद्धान्त का प्रतिपादन नही किया जा सकता। २० म्हाँरा सतगुरु बेगा आज्यो जी, म्हाँरी सुख री सीर¹ बुहावज्यो² जी । तुम बिछडियाँ दुख पाऊँ जी, मेरा मन माही मुरझाऊँ जी । मै कोयल ज्यूँ कुरलाऊँ जी, कुछ बाहर कहि न जगाऊँ जी । मोहि बाधण³ बिरह सतावै जी, कोई कहिया पार न पावै जी । ज्यूँ जल त्याग्या मीना जी, तुम दरसन बिन खीना जी । ज्यूँ चकवी रैण भावै जी, वा ऊगो⁴ भाण⁵ सुहावै जी । ऊ दिन कबै करोला जी, म्हाँरे ऑगण पाँव धरोलाँ जी । अरज करै मीराँ दासी, गुरु पद रज की मै प्यासो जी ॥२७९॥† पद की भाषा शुद्ध जोधपुरी बोली है । १ वह धार विशेष जो सन्तान प्रेम के कारण माता के स्तनौ से स्वत फूट निकलती है, २ बहा देना, ३ बाघिन, ४ उदित हुआ, ५ सूर्य । १२