भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १८५ मीन जल से बाहर कीन्हा, तुरत मर जाई। काठ लकरी बन परी, काठ घुन खाईं। ले अगन प्रभ डारि आए, भेसम हो जाई। बन बन ढूंढत मै फिरी, आली सुध नहि पाई। एक बेर दरसण दीजैं, सब कसर मिटि जाई। पात ज्यूँ पीरी परी, अरु विपत तन छाई। दासि मीराँ लाल गिरधर, मिल्या सुख छाई॥२९६॥ उपर्युक्त दोनो सम्मिश्रण से बना हुआ पद ही कुछ परिवर्त्तन के साथ स्वतंत्र पद के रूप मे चल पडा है। शेष पदाभिव्यक्ति से समन्वय नही होता, यह एक विशेष विचारणीय बात है। ६ मै अपने सैया सग साची। अब काहे की लाज सजनी, परगट हूवै नाची। दिवस भूख न चैन कबहिन, नीद निसु नासी। बेध वार को पार हवैगो, ज्ञान गुह गासी। कुल कुटुम्ब सब आनि बैठे, जैसे मधुमासी। दास मीराँ लाल गिरधर, मिटी जग हाँसी॥२९७॥ उपर्युक्त पद का समर्पण द्योतक पद (स० १) से गहरा साम्य है। दोनो ही पदो पर सत-मत का गहरा प्रभाव स्पष्ट हो उठता है। परिवार और समाज का गहरा विरोध कई पदो से अत्यन्त सुस्पष्ट हो उठता है तथापि उनके लौट आने की अभिव्यक्ति इस पद की विशेषता है। ७ राणा जी, सांवरे रग राची। कोई निरखत कोई हरखत है जी।