मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह प्रभु भाँत भाँत ना मेवा लावूँ, तमे पधारो वासु देवा मारे भुवन मा रजनी रेहवा। हाँ रे मे तो तजी छे लोकनी शका, प्रीतम का घर हे बका बाई मीराँ गे दीधा डका ॥३७९॥† ११ काये कूँ नलीयो तब तु कोय को न लीयो, रामजी को नाम तब तु काये को न लीयो। नव नव माँस तुँने उदर मे राख्यो, बड़ोरे भयो तबसे कुल लजायो। गुनका को बेटो गली माही डोले, पिता बिन पुत्र गुनका को कहायो। मीराँ बाई के प्रभु त्याहारा भजन बिना, आवो मनखोते ऐले गँवायो। ॥३८०॥† खड़ी बोली में प्राप्त पद १ मै तो हरि गुण गावत नाचूंगी। अपने महल मे बैठ कर प्रभु जी गीता भागवत बाचूँगी। ज्ञान ध्यान की गठरी बाध कर, हिरदे मन मे राखूँगी। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सदा प्रेम रस चाखूँगी ॥३८१॥† अभिव्यक्ति के आधार पर पद को प्रक्षिप्त कहा जा सकता है। २ मालक कुल आलम के हो, तुम साँचे श्री भगवान। स्थावर जगम पावक पाणी, धरती बीच समान। सब मे जलवा तेरा देखा, कुदरत के कुरबान। सुदामा के दारिद खोये, बाले की पहिचान। दो मुट्ठी तंडुल की चाबी, श्राप भये रथवान।