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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २२७ उन ने अपने कुल को देखा छूट गये तीर कमान। ना कोई मारे ना कोई मरता, तेरा यह अज्ञान। चेतन जीवन तो अजर अमर है, यह गीता को ज्ञान। मुझ पर तो प्रभु किरपा कींजे, बन्दी अपनी जान ॥३८२॥† उपर्युक्त पद मीराँ विरचित है ऐसा आभास पद के किसी भी अंश से नही मिलता। “मीर माधो” के निम्नाकित पद से उपर्युक्त पद की तुलना करने पर यह सुस्पष्ट हो जाता है कि “मीर माधो” का ही पद मीराँ के नाम पर चल पड़ा है। मालक कुल आलम के हो साँचे श्री भगवान ' स्थावर जगम पानी पावक, धरती बीच समान। सब मे जलवा तेरा देखा, कुदरत के कुरबान। सुदामा के दारिद खोये, पाडे की पहचान। दो मुट्ठी तडुल की चाबी, बख्शे दो जहान। भारत मे अर्जुन की खातर, आप भये रथवान। उसने अपने कुल को देखा, छूट गये तीर कमान। ना कोई मारे ना कोई मरता, तेरा ही अजान। यह तो चेतन अजर अमर है, यह गीता को ज्ञान। मुझ अज्ञान पर किरपा कीजे, बन्दा अपना जान। मीर माधो मै शरण तिहारी, लागे चरनन ध्यान ॥३८३॥ (बृहद्राग रत्नाकर, पृ० १७७, पद १३८) । ३ कछु लेना न देना मगन रहना। नाय किसी की काणा सुनवी, नाय किसी को अपनी कहना। गहरी गहरी नदिया नाव पुरानी, खेवटिये सूं मिलते रहना। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, साँवरा के चरण मे चित देना ॥३८४॥† पदाभिव्यक्ति मे पूर्वपर संगति का अभाव है।