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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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२२८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह मीराँ को प्रभु सांची दासी बनाओ। झूठो धंधो से मेरा फ़ंदा छुडाओ। लूटे ही लेत विवेक का डेरा। बुधि बल यदपि करु बहुतेरा। हाय राम, नहि कछु बस मेरा। मरत हू विवस प्रभु धाओ सबेरा। धर्म उपदेश नित प्रति सुनती हू। मन कुचाल से भी डरती हूं। सदा साधु सेवा करती हू। सुमिरण ध्यान मे चित धरती हू। भक्ति मार्ग दासी को दिखाओ। मीराँ को प्रभु साची दासी बनाओ ॥३८५॥† भाषा के आधार पर पद की प्रामाणिकता विशेष संदिग्ध है। विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद १ बन्दे बन्दगी मत भूल। चार दिना की कर ले डूबी, ज्यूँ पाडिभरा फूल। आया था ए लोभ के कारण, भूल गमाया मूल। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, रहना वे 'हजूर। ॥३८६॥† उपर्युक्त पद में ब्रज और पंजाबी भाषा का अजीब सम्मिश्रण है। अन्तिम पंक्ति का द्वितीयांश 'रहना वे हजूर' भी अर्थ हीन ही प्रतीत होता है। पंजाबी भाषा के प्रभाव के कारण पद की प्रामा- णिकता विशेष संदिग्ध है।

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