भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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७० मेघदूतम्

( स० तत्० ) सौधोत्सङ्गप्रणयविमुखः । लोला अपाङ्गा येषु तानि लोला-पाङ्गानि ( बहुव्री० ) तैः विद्युत: दामानीव विद्युद्दामानि ( उपमित० तत्० ) विद्युद्दाम्नां स्फुरितानि तैः = विद्युद्दामस्फुरितैः ( ष० तत्० ) चकितस्तैः । पौराश्च ताः अङ्गनाः ( कर्म० धा० ) तासाम् अथवा पौराणाम् अङ्गनाः ( ष० तत्० ) तासाम् ।

कोशः—उत्तरा दिगुदीची स्यात्, इत्यमरः । अयनं वर्त्ममार्गाध्वपन्थानः पदवी सृतिः, इत्यमरः । आविद्धं कुटिलं भुग्नं वेल्लितं वक्रमित्यपि, इत्यमरः । विशालोज्जयिनी समाः, इत्यमरः । उत्पलः प्रणयः स्यात्परिचये याच्ञायां सौहृदेऽपि च, यादवः । तडित्सौदामिनी विद्युच्चञ्चला चपला अपि, इत्यमरः । अप ग-स्त्वंगहीनेस्यान्नेत्रान्ते तिलकेऽपि च, इति मेदिनी । लोचनं नयनं नेत्रमित्यमरः ।

टिप्पणीउत्तराशाम्—यहाँ प्रपूर्वक "स्था" ( प्रस्थितस्य के ) धातु के अकर्मक होने के कारण उसके योग में उत्तराशा शब्द की "सकर्मक धातुभिर्योगे देशः कालो भावो गन्तव्योऽध्वा च कर्मसंज्ञक इति वाच्यम्" से कर्म संज्ञा हो जाती है और "कर्मणि द्वितीया" इस सूत्र से द्वितीया विभक्ति हुई है।
वक्रः पन्था०—निर्विन्ध्या नदी विन्ध्याचल पर्वत से उत्तर की ओर बहती है और "उज्जयिनी "निर्विन्ध्या" नदी से पूरव की ओर है जिसे आजकल उज्जैन कहते हैं एवं उत्तरापथ जिधर अलका है निर्विन्ध्या से पश्चिम में है अतः अलका जाने वाले के लिए उज्जयिनी जाने का मार्ग टेढ़ा पड़ेगा । उज्जयिनी पहले कभी "मालव" देश की राजधानी थी । यहाँ शिप्रा नदी बहती हैं एवं महाकालेश्वर का मन्दिर है । आज भी यहाँ दूर-दूर से लोग दर्शन करने जाते हैं । इसे ही विशाला नगरी भी कहते हैं । प्रातःस्मरणीय सात पुण्य पुरियों में उज्जयिनी भी अन्यतम है :—

"अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची ह्यवन्तिका ।
पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः ॥

मास्मः—यहाँ आशीर्वाद अर्थ से "भू" धातु से मा और स्म के योग में "स्मोत्तरे लङ् च" इस सूत्र में चकार पाठ होने से लुङ् लकार आता है एवं