मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)
Meghadutam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)
पृष्ठ 125, कुल 335 में से
संदर्भ में पढ़ें८६ मेघदूतम्
व्याख्या—जालोद्गीर्णैः=वातायननिर्गतैः, केशसंस्कारधूपैः=कामिनीवेणीसंस्कृतधूपैः, उपचितवपुः=परपुष्टदेहः, बन्धुप्रीत्या=बान्धवस्नेहेन, भवनशिखिभिः=सदनमयूरैः, दत्तनृत्योपहारः=प्रदत्तनर्तन उपहारः, कुसुम सुरभिषु=पुष्प सौरभेषु, ललितवनितापादरागाङ्कितेषु=सुन्दराङ्गनाचरणलाक्षारुचि-चिह्नितेषु, हर्म्येषु=अट्टालिकासु, अस्याः=उज्जयिन्याः, लक्ष्मीम्=शोभाम्, पश्यन्=बिलोकयन्, अध्वखेदम्=मार्गपरिश्रमम्, नयेथाः=दुरीकुरु।
शब्दार्थः—जालोद्गीर्णैः=जालियों से (खिड़की से) निकलते हुए, केशसंस्कारधूपैः=(कामिनियों के) केशों को सुगन्धित करने वाले धूप से, उपचितवपु=परिपुष्ट देह वाला, बन्धुप्रीत्या=बान्धव स्नेह से, भवनशिखिभिः=घर के (पालतू) मोरों द्वारा, दत्तनृत्योपहारः=जिसे नृत्य का उपहार दिया गया है, कुसुम-सुरभिषु=फूलों के सुगन्ध से सुगन्धित, ललितवनितापादरागाऽङ्कितेषु=सुन्दर स्त्रियों के पैरों में लगे महावर के चिह्न से चिह्नित, हर्म्येषु=महलों में, अस्याः=इस उज्जयिनी की, लक्ष्मीं=शोभा को, पश्यन्=देखता हुआ, अध्वखेदम्=रास्ते के परिश्रम को, नयेथाः=दूर करना।
भावार्थः—हे मेघ ! तत्रोज्जयिन्यां वातायनमार्गेनिर्गतैः कामिनीकचवासनार्थैः गन्धद्रव्यधूपैः परिपुष्टशरीरः भ्रातृस्नेहेन सदनमयूरेण नृत्यद्वारा कृतातिथ्यः (त्वम्) पुष्पपरिमलेषु सुन्दरललनाचरणालक्तकचिह्नितेषु भवनेषु उज्जयिन्याः शोभामवलोकयन् मार्गगमनजन्यपरिश्रममपनय ।
हिन्दी—हे मेघ ! वहाँ उज्जयिनी में खिड़की की जालियों से स्त्रियों के केशों को सुगन्धित करनेवाले धूप से परिपुष्ट देहवाले भ्रातृस्नेह से घर के पालतू मयूरों के द्वारा सत्कृत तुम पुष्प के सुगन्ध से सुगन्धित, सुन्दर स्त्रियों के पैरों में लगे महावर के चिह्नों से युक्त महलों में उज्जयिनी की शोभा को देखते हुए मार्ग में चलने के कारण उत्पन्न परिश्रम को दूर करना ।
समासः—जालेभ्यः उद्गीर्णाः तैः (ष० तत्०)। केशानां संस्कारः केशसंस्कारः (ष० तत्०) तस्य धूपस्तैः (ष० तत्०)। बन्धोः प्रीतिः तया बन्धुप्रीत्या (ष० तत्०)। उपचितं वपुर्यस्य स उपचितवपुः (बहु०)। भवनेषु