भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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पूर्वमेघ १०५

मछलियों के उद्वर्त्तन ( उछलन ) रूपी चितवनों से देखेगी । तुम भी, धीरता का अवलम्बन कर उसके अवलोकन को व्यर्थ मत होने देगा ।

समासः—प्रकृत्या सुभगः = प्रकृति-सुभगः ( तृ० तत्० ) । छाया चासौ आत्मा च छायात्मा ( कर्म० धा० ) । कुमुदानीव विशदानि = कुमुदविशदानि ( उपमानकर्म० ) । चटुलानि च तानि शफरोद्वर्त्तनानि चटुलशफरोद्वर्त्तनानि ( कर्मधा० ), तान्येव प्रेक्षितानि = चटुल-शफरोद्वर्तनप्रेक्षितानि ( रूपक० ) ।

कोशः—चित्तन्तु-चेतो हृदयम्, इत्यमरः । सुन्दरेऽधिकभाग्ये च दुर्दिनेतर-वासरे । तुरीयांशे श्रीमत्ति च सुभगः, इति शब्दार्णवः । सिते कुमुदे कैरवे, इत्यमरः । त्रिषु स्याच्चटुलं शीघ्रम् इति विश्वः ।

टिप्पणीप्रकृतिसुभगः—यहाँ 'प्रकृति' शब्द से प्रकृत्यादिभ्यः उपसंख्यानम्' इस सूत्र से तृतीया विभक्ति आती है तब तृतीया समास होता है । प्रवेशः—'प्र' उपसर्गपूर्वक प्रवेशार्थक 'विश' धातु से घञ् प्रत्यय करके 'प्रवेश' ऐसा रूप बनता है । कुमुदविशदानि = इस पद का विग्रह तो समास के समय प्रदर्शित किया गया है । यहाँ महोपाध्याय पं० मल्लिनाथजी ने 'कुमुदवत् विशदानि' ऐसा विग्रह किया है । यहाँ कुमुद' शब्द से 'तत्र तस्येव' इस सूत्र से 'वति' प्रत्यय किया गया है, न कि 'तेन तुल्यं क्रिया चेद्वतिः' इस सूत्र से, और इस सूत्र से 'क्रिया' पद की अनुवृत्ति भी 'तत्र तस्येव' इस सूत्र में नहीं जाती है । अतः 'वति', प्रत्यय होने में कोई अनुपपत्ति नहीं है । कुछ टीकाकार जैसे कि विद्याविनोद, शारदारञ्जन राय और संसारचन्द्र जी एवं मोहनदेव पन्त जी इत्यादि विद्वानों ने महोपाध्याय के उपर्युक्त विग्रह का खण्डन किया है, सम्भव है उन्हें 'तत्र तस्येव' यह सूत्र ध्यान में न रहा हो—धैर्यात्—'धीर' शब्द से 'ष्यञ्' प्रत्यय करके धैर्यं यह रूप बनता है । उक्त रूप पञ्चमी विभक्ति का है । यहां पञ्चमी विभक्ति 'ल्यब्लोपे कर्मण्यधिकरणे च' इस सूत्र से हुई है । यहाँ 'आश्रित्य' इस ल्यबन्त पद का लोप हुआ है ।

अलङ्कारः—यहाँ 'संकर' नामक अलङ्कार है । क्योंकि यहाँ पयः का चेतः से, प्रेक्षितों का कुमुदों के साथ समानता ( सादृश्य ) होने से शाब्दी उपमा