मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)
Meghadutam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२०४ मेघदूतम्
खद्योताली (ष० तत्०) तस्याः विलसितम् = खद्योतालीवि०सितम् (ष०तत्०) तेन सदृशी खद्योताली-विलसितनिभा (तृ० तत्०) ताम्। विद्युत् उन्मेषः विद्युदुन्मेषः (ष० तत्०) विद्युदुन्मेष एव दृष्टिः = विद्युदुन्मेषदृष्टिः (रूपक) ताम्। भवनस्य अन्तः अन्तर्भवनम् (ष० तत्०) अन्तर्भवनं पतिता = अन्तर्भवनपतिता (द्वि० तत्०) ताम्।
कोशः—सम्पातः पतने वेगे प्रवेशे वेद संविदे, इति शब्दार्णवः। कलभः करिशावकः, इत्यमरः। भाश्चविद्युत्त्विदीतयः, इत्यमरः। तडित्सौदामिनी विद्युच्चञ्चला चपला अपि, इत्यमरः। निभ-संकाशनीकाशप्रतीकाशोपमादयः, इत्यमरः।
टिप्पणी—संपातः—संपतनं संपातः = "सम्" उपसर्गपूर्वक पतनार्थक "पत्" धातु से भाव में "घञ्" प्रत्यय करके "संपात" ऐसा रूप निष्पन्न होता है। "सम्पातहेतोः" यहाँ "षष्ठी हेतुप्रयोगे" इस सूत्र से षष्ठी विभक्ति हुई है। गत्वा—"गम्" धातु से क्त्वा प्रत्यय करके गत्वा रूप बनता है। कलभ—बत्तीस साल की उम्र के हाथी के बच्चे को "कलभ" कहते हैं। निषण्णः—नि उपसर्गपूर्वक "सद्" धातु से "क्त" प्रत्यय करके नत्व षत्व णत्व आदि करके "निषण्णः" ऐसा रूप निष्पन्न होता है। अल्पाऽल्पभासः—यहाँ "अतिशयेन अल्पा" इस विग्रह में "प्रकारे गुणवचनस्य" इस सूत्र से "अल्प" की द्विरुक्ति हुई है। अन्तर्भवनम्—यहाँ "राजदन्तादिषु परम्" इस सूत्र से "अन्तर" इसका पूर्व निपात हुआ है।
अलङ्कारः—प्रस्तुत पद्य में "कलभतनुताम्" एवं "खद्योतालीविलसितनिभाम्" इन दोनों जगह उपमा एवं "विद्युदुन्मेषदृष्टिम्" यहाँ रूपक अलङ्कार है। तथा दोनों अलङ्कारों का अङ्गाङ्गिभाव होने के कारण "संकर" अलङ्कार है ॥ १८ ॥
तन्वी श्यामा शिखरिदशना पक्वबिम्बाधरोष्ठी
मध्येक्षामा चकितहरिणी-प्रेक्षणा निम्ननाभिः।