मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)
Meghadutam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२०६ मेघदूतम्
हिन्दी–हे मेघ ! दुबली युवती, तीखे दांतों वाली, पके हुए बिम्ब (कुंदरू) के समान निचले होंठ वाली, पतली कमरवाली, भयभीत मृगी के समान चञ्चल आँखों वाली, गहरी नाभि वाली, नितम्बभार से धीरे-धीरे चलने वाली, स्तनभार से (आगे की ओर) कुछ झुकी हुई-सी, स्त्रियों के विषय में ब्रह्मा की पहली रचना की तरह जो स्त्री वहाँ मेरे घर में हो (उसे मेरी पत्नी समझना, यह आगे से सम्बद्ध है)।
समासः—शिखरिणो दन्ताः यस्याः सा शिखरिदशना (बहु०) पक्वं च तद् बिम्बं पक्वबिम्बम् (क० धा०)। अधरञ्चासौ ओष्ठश्च अधरोष्ठः (कर्म०) पक्वबिम्बमिव अधरोष्ठो यस्याः सा पक्वबिम्बाधरोष्ठी (बहु०)। मध्येक्षामः यस्याः सा मध्येक्षामा (व्य० बहु०)। चकिता चासौ हरिणी चकितहरिणी (कृ० धा०) चकितहरिण्या इव प्रेक्षणं यस्याः सा चकितहरिणीप्रेक्षणा (व्यधि० बहु०)। निम्ना नाभिर्यस्याः सा निम्ननाभिः (बहु०)। श्रोण्याः भारः = श्रोणीभारः (ष० तत्०)। अलसं गमनं यस्याः सा अलसगमना (बहु०)। स्तोकं नम्रा = स्तोकनम्रा (सुप्सुपा०)। युवतयः विषयः युवतिविषयः (रूपक०) तस्मिन्।
कोशः—श्लक्ष्णं वध्रं कृशं तनु, इत्यमरः। श्यामा यौवनमध्यस्था, इत्युत्पलमाला। "शीते सुखोष्णा सर्वाङ्गी ग्रीष्मे या सुखशीतला। तप्तकाञ्चनवर्णाभा सा स्त्री श्यामेति कथ्यते॥" इत्याहुः भट्टिकाव्यस्य टीकाकृतः। शिखरं शैलवृक्षाग्रकक्षापुलककोटिषु, इति विश्वः।
टिप्पणी—तन्वी "तनु" यह दौर्बल्यरूप गुण का वाचक शब्द है—अतः "वोतो गुणवचनात्" इस सूत्र से ङीष हुआ है। श्यामा—इस स्त्री की विशेषता होती है कि गर्मी के महीनों में इनके शरीर शीतल और ठंडे समय में उष्ण हो जाते हैं। जैसा कि कहा भी गया है—
कूपोदकं वटच्छाया श्यामा नारीष्टिकागृहम्।
शीतकाले भवेदुष्णं उष्णकाले च शीतलम्॥