भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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२८ मेघदूतम्

वामभागे सुन्दरश्चातकः कर्णप्रियं शब्दङ्करोति। अन्यदपि वर्तते शकुनम्। यथा- संभोगसमये भवता सह परिचयजननात् बद्धपङ्क्तयः बकाङ्गनाः नयनसुभगं भवन्तमवश्यमेव सेविष्यन्ते।

हिन्दी—हे मेघ ! तुम्हारी यात्रा के समय ये शुभशकुन भी दिखाई दे रहे हैं—जैसे तुम्हारे अनुकूल ही पवन मंद गति वाले तुम्हें धीरे-धीरे प्रेरित कर रहा है एवं तुम्हारे बायीं ओर पपीहा कर्णप्रिय शब्द बोल रहा है और भी शकुन हैं जैसे संभोग के समय तुमसे परिचय होने के कारण ये पंक्तिबद्ध बगु- लियां आँखों को अच्छे लगने वाले तेरा जरूर आश्रय लेंगीं।

समासः—गन्धेन सहितः = सगन्धः (तृ० बहुव्री०)। गर्भस्य आधानं गर्भाधानम् (ष० तत्०) तदेव क्षणः = गर्भाधानक्षणः (रूपक) तस्मिन् परिचयः = गर्भाधानक्षण-परिचयः (स० तत्०) तस्मात्। आबद्धा माला याभिस्ताः आबद्धमालाः (बहुव्रीहिः)।

कोशः—यथा सादृश्य-योग्यत्वं वीप्सा स्वार्थानतिक्रमे इति यादवः। गन्धो गन्धक आमोदे लेशे सम्बन्धगर्वयोः इति विश्वः। वामस्तु वक्रे रम्ये स्यात् सव्ये वामगतेऽपि च इति शब्दार्णवः। सारङ्गाः स्तोकश्चातकः समाः इत्यमरः। गर्भोपकारके ह्यग्नौ मुखे पनस-कण्टके। कुक्षौ कुक्षिस्थजन्तौ च इति यादवः। क्षण उद्धर्षो मह उद्धव उत्सवः इत्यमरः। संस्तवः स्यात्परिचयः इत्यमरः। बलाका विसकण्ठिका इत्यमरः। लोचनं नयनं नेत्रमीक्षणं चक्षुरक्षिणी दृग्दृष्टी इत्यमरः।

टिप्पणी—मन्दं मन्दमिति—इस पद को कई लोग 'नुदन' का विशेषण मानकर उसकी व्याख्या करते हैं। परंतु गुणवाचक पदों की वीप्सा न होने के कारण एवं 'मन्दं' इस शब्द के गुणवाचक होने के कारण 'वीप्सा' में द्वित्व नहीं होगा। यदि इस अर्थ में 'प्रकारे गुणवचनस्य' इस सूत्र से द्वित्व विधान करें तब भी 'कर्म धारयवदुत्तरेषु' इस सूत्र से सुब्विभक्ति का लोप हो जाने पर 'मन्दमन्दम्' ऐसा अनीप्सित रूप बनने लगेगा। इसकी अपेक्षा यदि हम प्रथम मन्दं को मेघ का विशेषण मानकर दूसरे मन्दं को 'नुदन'